रेलवे कर्मचारियों जैसी सुविधाएं देने की मांग
दिल्ली में हुई बैठक के दौरान फेडरेशन ने कहा कि रक्षा मंत्रालय के सिविल कर्मचारी बेहद संवेदनशील और जोखिम वाले माहौल में काम करते हैं। हथियार, विस्फोटक और खतरनाक रसायनों से जुड़े कार्य करने के बावजूद उन्हें रेलवे कर्मचारियों जैसी सुविधाएं और वेतनमान नहीं मिलते। संगठन का मानना है कि दोनों ही क्षेत्र बड़े सरकारी संस्थान हैं, इसलिए कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। इसी वजह से वेतन, पदोन्नति और अन्य भत्तों में बराबरी की मांग उठाई गई है।
पुरानी पेंशन योजना फिर लागू करने की मांग
बैठक में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन का कहना है कि नई पेंशन व्यवस्था कर्मचारियों को भविष्य की पूरी सुरक्षा नहीं देती। इसलिए पुरानी व्यवस्था को दोबारा लागू करना कर्मचारियों के हित में होगा।
प्रमोशन व्यवस्था में सुधार की मांग
फेडरेशन ने कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया में हो रही देरी पर भी चिंता जताई। संगठन का कहना है कि कई कर्मचारी लंबे समय तक एक ही पद पर काम करते रहते हैं। इसलिए तय समय सीमा के भीतर नियमित प्रमोशन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
न्यूनतम सैलरी बढ़ाने की मांग
कर्मचारी संगठन ने आयोग से एंट्री लेवल कर्मचारियों की बेसिक सैलरी बढ़ाने की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि बढ़ती महंगाई और खर्चों को देखते हुए मौजूदा वेतन पर्याप्त नहीं है। इसलिए फिटमेंट फैक्टर बढ़ाकर कर्मचारियों की आय में बड़ा सुधार किया जाना चाहिए। यदि आयोग इन सुझावों पर सकारात्मक फैसला लेता है, तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।
मुआवजा राशि बढ़ाने पर जोर
ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिवारों को मिलने वाली सहायता राशि को भी बढ़ाने की मांग की गई है। फेडरेशन का कहना है कि वर्तमान मुआवजा राशि आज के समय के हिसाब से काफी कम है। इसलिए इसे बढ़ाकर परिवारों को बेहतर आर्थिक सहारा दिया जाना चाहिए। साथ ही संगठन ने मांग की है कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले रक्षा सिविल कर्मचारियों को भी सम्मानजनक दर्जा मिले।
जोखिम भत्ते की मांग
रक्षा क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों ने यह भी कहा कि उनका कार्य बेहद जोखिम भरा होता है। कई कर्मचारी विस्फोट और दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त जोखिम भत्ता नहीं मिलता। इसी को ध्यान में रखते हुए संगठन ने हर महीने अलग से रिस्क अलाउंस देने की मांग रखी है, ताकि कर्मचारियों को उनके जोखिम के अनुसार आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

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