राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों को तय समय सीमा के भीतर निपटाया जाए। विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा सभी जिलों के समाहर्ताओं को पत्र भेजकर 120 दिनों से अधिक समय से लंबित मामलों को अगले 15 दिनों में हर हाल में खत्म करने को कहा गया है।
तय समय सीमा में होगा निष्पादन
विभाग ने पहले से ही दाखिल-खारिज मामलों के लिए समय सीमा निर्धारित कर रखी है। नियमों के अनुसार, अविवादित मामलों का निपटारा 35 दिनों के भीतर किया जाना है, जबकि विवादित मामलों के लिए अधिकतम 75 दिनों की सीमा तय है। इसके बावजूद कई जिलों में मामले महीनों तक लंबित पाए गए, जिस पर सरकार ने नाराजगी जताई है।
जिलों को भेजी गई मामलों की सूची
विभागीय समीक्षा में सामने आया कि राज्य के कई अंचलों में दाखिल-खारिज के मामले 75 दिनों से लेकर 120 दिनों से अधिक समय तक लंबित पड़े हैं। इसके बाद विभाग ने अंचलवार लंबित मामलों की सूची तैयार कर सभी जिलों को भेज दी है। अब संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर इन मामलों का निष्पादन करने का निर्देश दिया गया है।
अधिकारियों की होगी नियमित निगरानी
सरकार ने जिला प्रशासन को यह भी निर्देश दिया है कि दाखिल-खारिज मामलों की नियमित समीक्षा की जाए। जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में अंचलाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखने और समय सीमा का सख्ती से पालन कराने को कहा गया है। विभाग ने साफ किया है कि भविष्य में किसी भी परिस्थिति में दाखिल-खारिज का मामला 75 दिनों से अधिक लंबित नहीं रहना चाहिए। यदि कहीं लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।
जमीन मालिकों को मिलेगा सीधा फायदा
सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा आम जमीन मालिकों को मिलेगा। लंबे समय से दाखिल-खारिज लंबित रहने के कारण लोगों को जमीन खरीद-बिक्री, बैंक लोन और अन्य सरकारी कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब मामलों के तेजी से निपटारे से लोगों को राहत मिलने के साथ जमीन संबंधी विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है।
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