यूपी में गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी, सरकार ने दी राहत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियों को तेज करते हुए गन्ना सर्वेक्षण प्रक्रिया में कई अहम बदलाव किए हैं। इस बार केवल गन्ने के रकबे का ही नहीं, बल्कि खेतों में अपनाई जा रही आधुनिक खेती प्रणालियों का भी विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य किसानों की वास्तविक स्थिति को समझकर उन्हें बेहतर सुविधाएं और योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

पहली बार दर्ज होगा अंत: फसली और एग्रोफारेस्ट्री का विवरण

इस बार के सर्वेक्षण में गन्ने के साथ की जाने वाली अंत: फसल, एग्रोफारेस्ट्री और फार्म फारेस्ट्री का भी अलग से विवरण दर्ज किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किसान गन्ने के साथ कौन-कौन सी अतिरिक्त फसलें उगा रहे हैं और उनसे उनकी आय में कितना फायदा हो रहा है।

ट्रेंच और जोड़ीदार पंक्ति विधि पर विशेष ध्यान

सरकार इस बार ट्रेंच और जोड़ीदार पंक्ति विधि से की गई गन्ना बोआई का अलग आंकड़ा भी तैयार करेगी। इन आधुनिक तकनीकों से गन्ना उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, ऐसे आंकड़ों से भविष्य में मशीनों के जरिए गन्ना कटाई को बढ़ावा देने में भी सुविधा होगी। इससे किसानों को मजदूरों की कमी जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है।

किसानों की समस्याओं के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन

गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर भी सक्रिय किया है। किसान 1800-121-3203 पर कॉल करके अपनी शिकायत, सुझाव या जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी।

आधुनिक तकनीक से होगा सर्वे

गन्ना विभाग ने सर्वेक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीक आधारित बना दिया है। सर्वे का काम हैंड हेल्ड कंप्यूटर और एंड्रायड आधारित मशीनों के जरिए किया जा रहा है। इससे किसानों के खेतों का डेटा तेजी और पारदर्शिता के साथ दर्ज हो सकेगा। सर्वेक्षण का कार्य 1 मई से शुरू हो चुका है और 30 जून तक पूरा किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि खेत में मौजूद वास्तविक गन्ना किस्म का ही रिकॉर्ड दर्ज किया जाए, ताकि उत्पादन का सही अनुमान लगाया जा सके।

किसानों को मिलेगा सीधा फायदा

नई सर्वे व्यवस्था से सरकार को गन्ना उत्पादन का सटीक अनुमान मिलेगा, जिससे पेराई सत्र की बेहतर तैयारी हो सकेगी। साथ ही किसानों को समय पर भुगतान, आधुनिक खेती की जानकारी और सरकारी योजनाओं का लाभ देने में भी आसानी होगी।

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