प्रदेश सरकार ने इस योजना को अमल में लाने के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इसी राशि से बड़ी संख्या में स्कूटी खरीदी जाएंगी। अनुमान है कि इस बजट से करीब 72 हजार तक स्कूटी खरीदी जा सकती हैं, हालांकि वितरण और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च को देखते हुए फिलहाल 70 हजार से अधिक छात्राओं को लाभ मिलने की संभावना है।
इस योजना से गांव की बेटियों को राहत
ग्रामीण क्षेत्रों की कई छात्राओं को कॉलेज पहुंचने के लिए रोज लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कई जगहों पर बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन की सुविधा सीमित होने के कारण छात्राओं को घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में समय की बर्बादी के साथ सुरक्षा और आर्थिक परेशानी भी बड़ी चुनौती बन जाती है। सरकार का मानना है कि स्कूटी मिलने से छात्राओं की निर्भरता कम होगी और वे समय पर कॉलेज पहुंच सकेंगी।
इलेक्ट्रिक स्कूटी पर सरकार का जोर
इस योजना के तहत पेट्रोल स्कूटी की जगह इलेक्ट्रिक स्कूटी देने का फैसला किया गया है। सरकार का उद्देश्य छात्राओं को कम खर्च में बेहतर सुविधा देना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। इलेक्ट्रिक स्कूटी से छात्राओं को पेट्रोल खर्च की चिंता नहीं रहेगी। साथ ही प्रदूषण भी कम होगा। अधिकारियों के मुताबिक एक स्कूटी पर करीब 55 हजार रुपये का खर्च आ सकता है।
पात्र छात्राओं की सूची तैयार
योजना के लिए पात्र छात्राओं की पहचान का काम भी शुरू हो चुका है। शिक्षा निदेशालय ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से स्नातक और परास्नातक अंतिम वर्ष पास करने वाली छात्राओं का डेटा मांगा है। इसी आधार पर लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। सरकार का कहना है कि योजना का लाभ हर वर्ग की योग्य छात्राओं तक पहुंचाया जाएगा और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता रखी जाएगी।

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