रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद भी बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। लेकिन सरकार बनाने के लिए विजय छोटी पार्टियों और वामपंथी दलों को साथ लाने की कोशिश में लग गए हैं।
कांग्रेस साथ आई
तमिलनाडु की राजनीति में विजय की पार्टी तेजी से उभरती ताकत बनती जा रही है। कांग्रेस के समर्थन के बाद यह माना जा रहा था कि सरकार बनाने का रास्ता आसान हो जाएगा, लेकिन आंकड़ों का गणित अभी भी पूरी तरह उनके पक्ष में नहीं बैठ पा रहा है। बताया जा रहा है कि बहुमत तक पहुंचने के लिए उन्हें 5 से 6 विधायकों के अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है। ऐसे में अब हर छोटी पार्टी का महत्व बढ़ गया है और समर्थन के बदले कई दल अपनी शर्तें भी रखने लगे हैं।
विजय ने उतारा अपना ‘चाणक्य’
राजनीतिक संकट को देखते हुए विजय ने अब अपनी पार्टी के तेजतर्रार नेता सीटीआर निर्मल कुमार को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी के भीतर उन्हें विजय का खास रणनीतिकार माना जाता है। निर्मल कुमार को आधिकारिक तौर पर विभिन्न दलों से बातचीत करने और समर्थन जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। वह लगातार नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं और सरकार गठन के लिए माहौल बनाने में जुटे हैं।
क्या सच में मुख्यमंत्री बन पाएंगे विजय?
तमिलनाडु में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विजय सच में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच पाएंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि वह छोटे दलों और वामपंथी पार्टियों को साथ लाने में सफल हो जाते हैं, तो राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो सकता है। विजय की लोकप्रियता पहले ही युवाओं के बीच काफी मजबूत मानी जाती है। फिल्मी स्टारडम के बाद अब वह राजनीति में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
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