इस परियोजना के तहत दक्षिण-पूर्व बिहार के 8 जिलों में सतही जल आधारित पेयजल व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भेजी गई है। इस योजना पर लगभग 5000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
इन 8 जिलों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
पहले चरण में उन जिलों को शामिल किया गया है, जहां गर्मी के मौसम में भू-जल स्तर तेजी से नीचे जाता है। इनमें शामिल हैं भागलपुर, बांका, मुंगेर, जमुई, नवादा, गया, औरंगाबाद और कैमूर। इन जिलों के लोगों को भविष्य में होने वाले पेयजल संकट से राहत देने के लिए यह योजना तैयार की गई है।
कैसे काम करेगी नई योजना?
इस परियोजना में नदियों, जलाशयों और तालाबों के पानी का इस्तेमाल किया जाएगा। बारिश के समय मिलने वाले पानी को संग्रहित किया जाएगा और फिर उसे आधुनिक तकनीक से शुद्ध करके लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए जल स्रोतों से पानी को पाइपलाइन के माध्यम से ट्रीटमेंट प्लांट और फिर टंकी तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद घरों तक साफ पेयजल की सप्लाई की जाएगी।
दो साल में पूरा करने का लक्ष्य
सरकार ने इस परियोजना को लगभग दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद योजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भू-जल स्तर में और गिरावट हो सकती है। इसलिए अभी से वैकल्पिक जल स्रोतों को मजबूत करना जरूरी है।
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर होगी शुरुआत
इस योजना को शुरुआत में कुछ चुनिंदा प्रखंडों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। इनमें पीरपैंती, सन्हौला, कटोरिया, बेलहर, तारापुर, असरगंज, अघौड़ा और मेसकौर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। अगर शुरुआती चरण में योजना सफल रहती है तो इसे बिहार के अन्य जिलों और प्रखंडों तक भी विस्तार दिया जाएगा।

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