इस बदलाव के तहत उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित चौधरी चरण सिंह-राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान की केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला की जांच क्षमता बढ़ाई गई है।
अब 42 प्रकार के टीकों की हो सकेगी जांच
सरकार के नए फैसले के बाद इस प्रयोगशाला में अब 42 तरह के पशु टीकों की जांच की जा सकेगी। इससे पहले यहां केवल दो प्रकार के टीकों की जांच की सुविधा थी। नई व्यवस्था में कुत्तों, घोड़ों, मुर्गियों और अन्य पालतू व घरेलू पशुओं से जुड़ी कई बीमारियों के टीकों की जांच शामिल होगी। इनमें कैनाइन डिस्टेंपर, कैनाइन कोरोनावायरस, डक प्लेग, फाउल पॉक्स, साल्मोनेला और टेटनस जैसी बीमारियों से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाले टीकों की जांच भी की जा सकेगी।
नियमों में किया गया बदलाव
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार ने औषधि नियमावली, 1945 में संशोधन किया है। यह बदलाव औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के तहत किया गया है। सरकार की ओर से इसे भारत के राजपत्र में अधिसूचना जारी कर कानूनी रूप दिया गया है। इसका उद्देश्य पशु टीकों की जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।
पशुपालकों को मिलेगा लाभ
इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ देश के पशुपालकों को मिलने की उम्मीद है। जांच सुविधा बढ़ने से पशुओं के लिए सुरक्षित और गुणवत्ता वाले टीके उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। समय पर सही टीका मिलने से पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकेगा। इससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा और दूध, मांस या अन्य उत्पादन क्षमता में भी सुधार आ सकता है।
टीका कंपनियों के लिए भी राहत
नई व्यवस्था से टीका बनाने वाली कंपनियों को भी फायदा होगा। अब टीकों की जांच और मंजूरी की प्रक्रिया पहले के मुकाबले तेज हो सकती है। इससे आयात किए जाने वाले पशु टीकों की जांच भी आसान होगी और बाजार में नए टीकों की उपलब्धता बढ़ सकती है।

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