अब तय नियमों के तहत मिलेगा मुआवजा
पहले जेल में किसी कैदी की अप्राकृतिक मौत होने पर मुआवजा देने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी। अलग-अलग मामलों में जांच एजेंसियों या संबंधित आयोगों की सिफारिश के आधार पर निर्णय लिया जाता था। अब नई नीति लागू होने के बाद प्रत्येक मामले में निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाएगी और पात्र परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
मौत के कारण के आधार पर सहायता राशि
नई व्यवस्था में मुआवजे की राशि घटना की परिस्थितियों के अनुसार निर्धारित की गई है। यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी कैदी की मृत्यु जेल कर्मचारियों की मारपीट या उत्पीड़न के कारण हुई है, तो उसके विधिक उत्तराधिकारी को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं यदि मृत्यु चिकित्सा संबंधी लापरवाही, जेल प्रशासन की लापरवाही, कैदियों के बीच हिंसक विवाद या किसी अन्य अप्राकृतिक कारण से होती है, तो संबंधित परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
आत्महत्या के मामलों के लिए भी अलग प्रावधान
नई नीति में जेल के भीतर आत्महत्या की घटनाओं को भी शामिल किया गया है। ऐसे मामलों में मृतक कैदी के निकटतम परिजन को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य ऐसे कठिन समय में परिवार को तत्काल आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना है।
जेल कैदियों को जांच के बाद ही मिलेगा मुआवजा
किसी भी मामले में सहायता राशि जारी करने से पहले विस्तृत जांच कराई जाएगी। इसके लिए जिला स्तर पर एक चार सदस्यीय समिति गठित होगी, जिसकी अध्यक्षता जिला अधिकारी (डीएम) करेंगे। समिति में पुलिस अधीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, सिविल सर्जन तथा संबंधित जेल के अधीक्षक शामिल रहेंगे। जांच के दौरान घटना के सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी और उसके बाद अपनी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भेजी जाएगी।
इन जेल कैदियों को अंतिम स्वीकृति के बाद होगा भुगतान
जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद मामला आगे की स्वीकृति के लिए संबंधित उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने पर आर्थिक सहायता की राशि जिला प्रशासन के माध्यम से जारी की जाएगी, ताकि भुगतान की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी हो सके।
नई व्यवस्था में 30 दिनों के भीतर खाते में पहुंचेगी सहायता राशि
नई व्यवस्था के तहत यह भी सुनिश्चित किया गया है कि मुआवजा स्वीकृत होने के बाद मृतक कैदी के विधिक उत्तराधिकारी या निकटतम परिजन के बैंक खाते में 30 दिनों के भीतर राशि भेज दी जाए। इससे परिवारों को अनावश्यक देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

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