केंद्र सरकार का फैसला, बिहार के छात्रों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार के अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता से राज्य के उन प्रखंडों में नए छात्रावास बनाए जाएंगे, जहां अब तक इस प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस पहल का उद्देश्य दूर-दराज़ के क्षेत्रों से आने वाले छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराकर उनकी पढ़ाई को आसान बनाना है।

369 प्रखंडों में बनेगा छात्रावास

राज्य सरकार के अनुसार बिहार के कुल 534 प्रखंडों में से फिलहाल केवल 165 प्रखंडों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रावास संचालित हैं। वहीं 369 प्रखंड ऐसे हैं, जहां छात्रों को अब तक इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसी कमी को दूर करने के लिए व्यापक योजना तैयार की गई है।

केंद्र सरकार से मिली मंजूरी

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की पहल पर इस परियोजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष रखा गया। नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के अंतर्गत नए छात्रावासों के निर्माण के लिए सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है। इससे परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

दो चरणों में होगा निर्माण कार्य

सरकार ने छात्रावास निर्माण को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना बनाई है। पहले चरण में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 185 छात्रावासों का निर्माण कराया जाएगा। इसके बाद अगले वित्तीय वर्ष में शेष 184 छात्रावास बनाए जाएंगे। इस तरह कुल 369 नए छात्रावास तैयार किए जाएंगे, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।

छात्रों को मिलेगी बेहतर शैक्षणिक सुविधा

नए छात्रावास बनने से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए शहरों या प्रखंड मुख्यालयों तक पहुंचने में आसानी होगी। सुरक्षित आवास, नियमित अध्ययन का माहौल और आवश्यक सुविधाएं मिलने से छात्र अपनी शिक्षा पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर रहने की व्यवस्था का अतिरिक्त बोझ भी कम होगा।

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