2011 की जनगणना के आधार पर होगा परिसीमन
सरकार ने पंचायतों के नए परिसीमन के लिए वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाने का निर्णय लिया है। इससे पंचायतों की सीमाओं और संरचना का पुनर्निर्धारण किया जाएगा ताकि वर्तमान जनसंख्या के अनुसार स्थानीय प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इससे पहले राज्य में पंचायतों का व्यापक परिसीमन 1991 की जनगणना के आधार पर किया गया था, जिसके बाद नई पंचायतों का गठन किया गया था।
पंचायतों की संख्या बढ़ने की संभावना
नई परिसीमन प्रक्रिया के बाद बिहार में पंचायतों की संख्या बढ़ सकती है। माना जा रहा है कि अधिक आबादी वाली पंचायतों को विभाजित कर नई ग्राम पंचायतों का गठन किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक कार्यों को अधिक व्यवस्थित करने और लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
जनसंख्या के अनुसार होगा नया ढांचा
नई व्यवस्था में पंचायतों और अन्य स्थानीय इकाइयों का गठन निर्धारित जनसंख्या मानकों के अनुसार किया जाएगा। ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, वार्ड और जिला परिषद क्षेत्रों की सीमाएं जनसंख्या के आधार पर तय होंगी। इसका उद्देश्य प्रत्येक क्षेत्र में संतुलित प्रतिनिधित्व और बेहतर प्रशासन सुनिश्चित करना है।
प्राकृतिक सीमाओं को प्राथमिकता
परिसीमन के दौरान पंचायतों की सीमाएं तय करते समय प्राकृतिक भौगोलिक संरचनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। जहां नदी, नहर, झील, जंगल या पहाड़ जैसी प्राकृतिक सीमाएं उपलब्ध होंगी, वहीं उन्हें आधार बनाया जाएगा। जिन क्षेत्रों में ऐसी प्राकृतिक सीमाएं नहीं होंगी, वहां सड़क, विद्यालय, अस्पताल, धार्मिक स्थल, श्मशान, कब्रिस्तान या अन्य स्थानीय पहचान वाले स्थलों के आधार पर सीमा निर्धारण किया जाएगा।
जिलाधिकारियों को अहम जिम्मेदारी
पूरी परिसीमन प्रक्रिया की निगरानी जिलाधिकारियों के नेतृत्व में की जाएगी। जिला निर्वाचन पदाधिकारी के रूप में वे पंचायतों की नई सीमाएं तय कराने, प्रस्तावों की जांच करने और पूरी प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुसार पूरा कराने की जिम्मेदारी निभाएंगे।
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