6% वार्षिक इंक्रीमेंट की मांग
मौजूदा व्यवस्था में केंद्रीय कर्मचारियों को हर वर्ष 3 प्रतिशत का वार्षिक वेतनवृद्धि मिलती है। अब इसे बढ़ाकर 6 प्रतिशत किए जाने का सुझाव दिया गया है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए मौजूदा इंक्रीमेंट पर्याप्त नहीं रह गया है। यदि भविष्य में इस मांग पर सहमति बनती है, तो कर्मचारियों की आय में अपेक्षाकृत तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
न्यूनतम वेतन बढ़ाने की भी मांग
कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर 69,000 रुपये करने का सुझाव भी दिया है। इसके अलावा महंगाई से जुड़ी नई वेतन प्रणाली, एकीकृत पे-मैट्रिक्स और पेंशन ढांचे में सुधार जैसे प्रस्ताव भी आयोग के समक्ष रखे गए हैं।
पे-स्केल मर्जर की मांग क्यों उठी?
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि मौजूदा पे-मैट्रिक्स में कई ऐसे वेतन स्तर हैं, जिनमें वेतन का अंतर बहुत कम है, जबकि कर्मचारियों की जिम्मेदारियां लगभग समान होती हैं। ऐसे में अलग-अलग लेवल बनाए रखने से कर्मचारियों के बीच असमानता की भावना पैदा होती है। इसी वजह से कुछ पे-लेवल को आपस में मिलाकर एक सरल और संतुलित वेतन संरचना तैयार करने का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार लेवल 2 और 3, लेवल 4 और 5, लेवल 7 और 8 तथा लेवल 9 और 10 को एकीकृत करने की मांग की गई है।
लेवल-5 कर्मचारियों के लिए अलग प्रस्ताव
कर्मचारी संगठनों ने यह भी सुझाव दिया है कि लंबे समय से एक ही वेतन स्तर पर कार्यरत लेवल-5 कर्मचारियों को एकमुश्त अपग्रेड देकर लेवल-6 में शामिल किया जाए। उनका कहना है कि इससे करियर ग्रोथ की रफ्तार बढ़ेगी और पदोन्नति से जुड़ी लंबे समय की समस्याओं में राहत मिलेगी।

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