क्यों खास है यह कदम?
इन नए संस्थानों की शुरुआत से करीब 7,000 से अधिक अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी, जो राज्य के युवाओं के लिए एक सुनहरा मौका साबित होंगी। साथ ही, निजी पॉलिटेक्निक संस्थानों की संख्या भी 73 तक पहुंच गई है, जिससे कुल मिलाकर राज्य में तकनीकी शिक्षा का बुनियादी ढांचा काफी मजबूत हुआ है।
कहां-कहां खुले हैं नए संस्थान?
राज्य के विभिन्न जिलों में नए संस्थान खोले गए हैं, जिससे क्षेत्रीय संतुलन भी बना रहेगा और छात्रों को दूर-दराज की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। पटना में सबसे अधिक 12 संस्थान खोले गए हैं। जबकि गया में 7 संस्थान। नालंदा, वैशाली, और पश्चिम चंपारण में 2-2। अररिया, सीवान, भागलपुर, मधेपुरा, भोजपुर, समस्तीपुर और लखीसराय में एक-एक संस्थान की शुरुआत हुई है।
कौन-कौन से कोर्स होंगे उपलब्ध?
नए पॉलिटेक्निक संस्थानों में आधुनिक और उद्योग-उन्मुख कोर्सों की पेशकश की जाएगी, जिनमें प्रमुख हैं: सिविल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, केमिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, फायर टेक्नोलॉजी एंड सेफ्टी। इन सभी कोर्सों को AICTE (अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद) से मान्यता मिल चुकी है, जिससे इनकी वैधता और गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।
नामांकन प्रक्रिया कैसी होगी?
सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों की तरह इन नए संस्थानों में भी नामांकन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ही होगा। यह परीक्षा राज्य स्तर पर आयोजित की जाएगी और उसी मेरिट के आधार पर संस्थान व ट्रेड का आवंटन किया जाएगा। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और योग्य विद्यार्थियों को मौका मिलेगा।

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