बिहार में जमीन खतियान को लेकर नई पहल: रैयतों के लिए राहत!

जमुई। बिहार सरकार द्वारा भूमि रिकॉर्ड्स की पारदर्शिता और सटीकता को लेकर एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने "राजस्व महाभियान" के तहत खतियान (जमाबंदी की प्रति) का वितरण शुरू कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य राज्य के हर रैयत (भूमि धारक) तक उनके जमीन से जुड़े दस्तावेज पहुंचाना और उसमें मौजूद संभावित त्रुटियों को ठीक करना है।

पहले चरण में घर-घर जाकर वितरण

महाभियान के पहले चरण में सरकारी कर्मियों द्वारा गांव-गांव, घर-घर जाकर खतियान की प्रतियां बांटी गईं। इन प्रतियों में जमीन से संबंधित महत्वपूर्ण विवरण शामिल हैं जैसे खाता संख्या, खेसरा संख्या, रकवा (भूमि की माप), रैयत का नाम, पिता का नाम और पता आदि। ये प्रतियां उस ऑनलाइन जमाबंदी की प्रति हैं जो आम लोगों को डिजिटल माध्यम से देखने में कठिनाई न हो, इसीलिए उन्हें भौतिक रूप में मुहैया कराई गई हैं।

लेकिन खतियान में मिल रही हैं कई गलतियां

हालांकि यह प्रयास सराहनीय है, परंतु इसमें सामने आ रही गलतियों ने रैयतों को असमंजस में डाल दिया है। कई मामलों में नाम की वर्तनी गलत है, पिता का नाम अधूरा या त्रुटिपूर्ण है, तो कहीं जमीन के विवरण में गड़बड़ी है। उदाहरण के लिए, किसी का खाता नंबर सही है, लेकिन खेसरा नंबर गलत दर्ज है। कई जमाबंदियों में रकवा को “0” दर्शाया गया है, जबकि असल में वह जमीन रैयत के स्वामित्व में है।

समाधान के लिए विभाग ने दिया है मौका

इन सभी समस्याओं को देखते हुए विभाग ने रैयतों को सुधार का अवसर भी दिया है। दूसरे चरण के अंतर्गत प्रत्येक क्षेत्र में शिविर लगाकर रैयतों से परिमार्जन फॉर्म (संशोधन प्रपत्र) भरवाए जा रहे हैं। अंचलाधिकारी विश्वजीत कुमार के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सरल बनाई गई है ताकि कोई भी रैयत अपने दस्तावेजों में सुधार आसानी से करवा सके।

परिमार्जन फॉर्म कैसे भरें?

गलतियों को पहचानें: सबसे पहले आपको दी गई खतियान प्रति को ध्यान से पढ़ना है। उसमें जो भी गलतियां नजर आएं नाम, पिता का नाम, खाता/खेसरा नंबर, रकवा आदि उन्हें चिन्हित करें।

संबंधित दस्तावेज इकट्ठा करें: सुधार के लिए आपको प्रमाण के तौर पर भूमि दस्तावेज, पहचान पत्र, पर्चा, रसीद आदि संलग्न करने होंगे।

शिविर में आवेदन दें: तय तिथि और स्थान पर लगे शिविर में जाकर परिमार्जन फॉर्म भरें और दस्तावेज जमा करें।

प्राप्ति रसीद लें: आवेदन देने के बाद प्राप्ति रसीद लेना न भूलें, ताकि आगे जरूरत पड़ने पर आप अपने आवेदन का स्टेटस ट्रैक कर सकें।

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