प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत-EU आर्थिक संबंधों में एक मील का पत्थर बताया है। यह एफटीए भारत को वैश्विक व्यापार नेटवर्क में और गहराई से जोड़ने वाला साबित होगा। यूरोपीय बाजार में भारतीय कंपनियों की उपस्थिति मजबूत होगी, जबकि EU को भारत जैसे बड़े उपभोक्ता बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। मौजूदा समय में भारत का EU के साथ व्यापार अधिशेष में है, जो इस डील के बाद और बढ़ सकता है।
90% से अधिक वस्तुओं पर शुल्क में कटौती
यूरोपीय संघ की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस एफटीए के तहत भारत को निर्यात होने वाले 90 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी कटौती की जाएगी। इससे यूरोपीय कंपनियों को करीब 4 अरब यूरो की सालाना बचत होने का अनुमान है। वहीं, भारतीय उत्पादों के लिए यूरोप के हाई-वैल्यू बाजारों में पहुंच और आसान हो जाएगी।
भारतीय उद्योगों के लिए गेम-चेंजर
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने इस समझौते को भारत के वैश्विक व्यापार के लिहाज से एक रणनीतिक सफलता करार दिया है। CII के अनुसार, EU को भारतीय निर्यात के लगभग 99 प्रतिशत उत्पादों पर तरजीही पहुंच मिलना घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा। संघ का मानना है कि इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी, सप्लाई चेन और गहरी होंगी और दीर्घकालिक विदेशी निवेश आकर्षित होगा।
जीरो टैरिफ से भारत को बड़ा फायदा
इस समझौते में कई भारतीय उत्पादों पर EU का आयात शुल्क शून्य किए जाने का प्रावधान है। उदाहरण के तौर पर—
मरीन उत्पाद: 26% से 0%, जूते: 17% से 0%
रसायन: 12.8% से 0%, परिधान और कपड़ा: 12% से 0%
रेल और जहाज निर्माण: 7% से 0%, खिलौने और खेल सामान: 4.7% से 0%, रत्न और आभूषण: 4% से 0%
इन कटौतियों से भारतीय उत्पादों की कीमतें यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगी।
बदल रही है भारत की निर्यात प्रोफाइल
जानकारों के अनुसार, EU को भारत का निर्यात अब पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं रहा। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और रसायन जैसे मध्यम और उच्च तकनीक वाले उत्पादों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। यह संकेत देता है कि भारत की वैल्यू चेन में स्थिति मजबूत हो रही है। वहीं, इस डील से अमेरिकी टैरिफ से भी भारत को बड़ी राहत मिलेगी।
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