भारत की तेज रफ्तार के पीछे क्या कारण हैं?
भारत की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में लगातार तेज हुई है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं, विशाल और युवा आबादी, जो कामकाजी उम्र में तेजी से शामिल हो रही है। मजबूत घरेलू मांग और खपत। सरकार का इन्फ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप्स और डिजिटल इकोनॉमी पर फोकस। इन वजहों से भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6–8 प्रतिशत के दायरे में बनी हुई है, जो विकसित देशों की तुलना में काफी अधिक है।
भारत ने जापान को कैसे छोड़ा पीछे?
जापान लंबे समय तक दुनिया की तीसरी या चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में उसकी विकास गति बेहद धीमी रही, लगभग 1–2 प्रतिशत। इसके पीछे कारण रहे तेजी से बूढ़ी होती आबादी और श्रमबल की कमी। कमजोर घरेलू मांग और लंबे समय से ठहरी अर्थव्यवस्था। वहीं भारत की तेज ग्रोथ ने तस्वीर पलट दी। 2025 में भारत की नॉमिनल जीडीपी जापान से आगे निकल गई और भारत चौथे स्थान पर पहुंच गया।
जर्मनी को पछाड़ने की दूरी कितनी?
अब नजरें जर्मनी पर टिकी हैं, जिसकी जीडीपी 2025 के अंत में करीब 4.7 से 5 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है। भारत और जर्मनी के बीच फिलहाल करीब 0.5–0.8 ट्रिलियन डॉलर का अंतर है। लेकिन असली फर्क दोनों देशों की ग्रोथ रेट में है। भारत कस रियल ग्रोथ 6.5–7.3%, नॉमिनल ग्रोथ करीब 9–11% हैं। जबकि जर्मनी का रियल ग्रोथ 0–1.5%, नॉमिनल ग्रोथ 2–3% हैं।
तीसरे स्थान की टाइमलाइन
सरकार और वैश्विक संस्थानों जैसे IMF, वर्ल्ड बैंक और मूडीज के अनुमानों के मुताबिक भारत 2028 या 2029 तक जर्मनी को पीछे छोड़ सकता है। कुछ आकलन इसे 2027–28 में भी संभव मानते हैं, लेकिन 2028–2030 का समय सबसे सुरक्षित माना जा रहा है। 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था 7 ट्रिलियन डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।
भारत के लिए आय अभी चुनौती
भारत के लिए प्रति व्यक्ति आय अब भी बड़ी चुनौती है। यह जापान और जर्मनी जैसे देशों से कई गुना कम है। देश की लगभग एक-चौथाई आबादी युवा है, और सबसे बड़ी जिम्मेदारी है इन युवाओं के लिए पर्याप्त, स्थायी और गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा करना।
जीडीपी की अनुमानित नई रैंक?
2025 के अंत और 2026 की शुरुआत के आंकड़ों के अनुसार, भारत अब जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।
1 .अमेरिका (USA): $32.0 ट्रिलियन।
2 .चीन (China): $20.5 ट्रिलियन।
3 .जर्मनी (Germany): 5.3 ट्रिलियन।
4 .भारत (India): $4.5 ट्रिलियन।

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