मुजफ्फरपुर से शुरू हुआ सफर, अब 20 जिलों तक
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि इस पहल की शुरुआत वर्ष 2009 में मुजफ्फरपुर जिले से एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह छोटा सा प्रयोग एक बड़े आंदोलन में बदल जाएगा। आज हालात यह हैं कि बिहार के 20 जिलों के 90 प्रखंडों में जीविका दीदियां मधुमक्खी पालन के जरिए अपनी आजीविका चला रही हैं।
हजारों महिलाएं जुड़ीं, करोड़ों का कारोबार
वर्तमान में करीब 11,855 महिलाएं इस कार्य से सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। आंकड़ों के अनुसार, ये महिलाएं हर साल 10 से 12 करोड़ रुपये मूल्य के शहद का उत्पादन कर रही हैं। खास बात यह है कि यह काम महिलाएं अपने घरेलू दायित्वों के साथ आसानी से कर पा रही हैं और औसतन 10 हजार रुपये प्रति माह की आय अर्जित कर रही हैं। ग्रामीण इलाकों में यह आमदनी उनके परिवार के लिए बड़ा सहारा बन रही है।
महिलाओं से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
सरकार का मानना है कि मधुमक्खी पालन जैसी योजनाएं महिलाओं को स्थायी स्वरोजगार देने का सशक्त माध्यम हैं। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिली है। आत्मनिर्भर बनती महिलाएं अब अपने फैसले खुद ले पा रही हैं और समाज में उनकी भूमिका भी मजबूत हुई है।
देश-दुनिया के लिए प्रेरणा बनता बिहार मॉडल
‘जीविका’ दीदियों की यह सफलता कहानी आज राज्य के अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। यह साबित हो रहा है कि अगर सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बाजार की सुविधा मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी बड़े स्तर पर आर्थिक बदलाव की अगुआ बन सकती हैं।

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