पुनर्वास और प्रशिक्षण की व्यवस्था
राज्य के कई जिलों में भिक्षुक पुनर्वास गृह संचालित किए जा रहे हैं, जहां भिक्षावृत्ति करने वाले लोगों को सुरक्षित आवास, भोजन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इन केंद्रों में उन्हें दैनिक जीवन से जुड़े कौशल और स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे भविष्य में अपने पैरों पर खड़े हो सकें। इस योजना में भिक्षुकों को छोटे व्यवसाय के लिए 10 हजार रुपये की एकमुश्त राशि भी मिलती है।
स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता
योजना के तहत पात्र भिक्षुकों को छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए सरकार की ओर से एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि उन्हें आजीविका के नए साधन अपनाने में मदद करती है। साथ ही आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाता खुलवाने जैसी जरूरी प्रक्रियाओं में भी सरकारी सहयोग दिया जाता है।
उत्पादक समूहों से जुड़कर आय
भिक्षुकों के पुनर्वास के लिए सक्षम उत्पादक समूह बनाए गए हैं, जहां उन्हें अगरबत्ती, दीया-बाती, झाड़ू, चप्पल और जूट से बने उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इन उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय सीधे उन लोगों में वितरित की जाती है, जिससे उन्हें नियमित कमाई का जरिया मिलता है।
सामाजिक सुरक्षा और विशेष प्रावधान
वृद्ध, विधवा और दिव्यांग भिक्षुकों के लिए पेंशन की सुविधा भी योजना में शामिल है। बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि अगली पीढ़ी भिक्षावृत्ति के चक्र में न फंसे। इसके अलावा गंभीर बीमारी या दिव्यांगता की स्थिति में आवश्यक प्रमाण पत्र के आधार पर अतिरिक्त सहायता भी दी जाती है।

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