स्टार्टअप्स और कंपनियों को मदद
अधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत 95 कंपनियों को उद्योग स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं। इससे चिप डिजाइन स्टार्टअप्स का खर्च कम होगा और उन्हें बेहतर उपकरणों तक पहुंच मिलेगी। डिजाइन चिप बनाने की प्रक्रिया में सेमीकंडक्टर चिप सबसे ज्यादा मूल्य जोड़ता है और यह वैश्विक सेमीकंडक्टर बिक्री में 30-35 प्रतिशत योगदान देता है।
बजट और मौजूदा उपलब्धियां
इस योजना के लिए 76,000 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। DLI स्कीम के अंतर्गत अब तक 16 टेप-आउट, 6 ASIC चिप्स, 10 पेटेंट और 1,000 से ज्यादा इंजीनियर शामिल हो चुके हैं। इसके साथ ही निजी निवेश में भी तीन गुना वृद्धि देखी गई है।
क्यों जरूरी है यह पहल?
DLI स्कीम स्टार्टअप्स और MSME सेक्टर को डिजाइन से लेकर प्रोडक्ट बनाने तक पूरी मदद देती है। इसका उद्देश्य भारत में घरेलू सेमीकंडक्टर डिजाइन उद्योग की कमजोरियों को दूर करना और इसे आत्मनिर्भर बनाना है। इसके साथ ही सी2एस प्रोग्राम (Chips to Startup) के तहत देशभर के 85,000 इंजीनियर, मास्टर्स और पीएचडी छात्र को चिप डिजाइन की विशेषज्ञता हासिल करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
आत्मनिर्भर भारत
भारत में मजबूत फैबलेस क्षमता के बिना देश विदेशी तकनीक पर निर्भर रहता है। अब DLI स्कीम से भारत न केवल तकनीकी ज्ञान और उत्पादन में आत्मनिर्भर होगा, बल्कि आयात पर निर्भरता भी कम होगी। इस पहल से देश भविष्य में तकनीकी नेतृत्व हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

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