प्राथमिकता के आधार निपटारा
अब तक पोर्टल पर आने वाले आवेदनों का निपटारा उनके जमा होने के क्रम में किया जाता था। लेकिन नई व्यवस्था के तहत कुछ श्रेणियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे संवेदनशील और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण मामलों का समाधान तय समय-सीमा के भीतर किया जा सकेगा।
SC/ST भूमि को पहले सुनवाई
नए आदेश के अनुसार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े भूमि विवादों और आवेदनों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इन मामलों को अब लंबी कतार में इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि इन्हें पहले निपटाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि कमजोर और वंचित वर्गों को भूमि संबंधी समस्याओं में शीघ्र न्याय मिल सके।
इन आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई
‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ के माध्यम से प्राप्त शिकायतों और आवेदनों को भी अब प्राथमिक श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मामलों को FIFO सिस्टम के तहत लाइन में खड़ा नहीं किया जाएगा, बल्कि सीधे त्वरित निष्पादन की प्रक्रिया में लिया जाएगा। इससे जनता की शिकायतों का समाधान तेजी से संभव होगा।
सॉफ्टवेयर में बदलाव के निर्देश
इस नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभाग ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) को बिहारभूमि पोर्टल के सॉफ्टवेयर में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने का निर्देश दिया है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्राथमिकता वाले आवेदनों की पहचान और उनका निपटारा बिना किसी तकनीकी बाधा के हो सके।
अधिकारियों को सख्त चेतावनी
राज्य सरकार ने इस आदेश को गंभीरता से लागू कराने के लिए सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और अंचलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कहा गया है कि प्राथमिकता वाले मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।
31 मार्च 2026 के बाद होगी समीक्षा
यह व्यवस्था फिलहाल 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगी। इसके बाद सरकार इसके प्रभाव और परिणामों की समीक्षा करेगी। समीक्षा के आधार पर यह तय किया जाएगा कि FIFO प्रणाली को दोबारा लागू किया जाए या फिर नई प्राथमिकता आधारित व्यवस्था को आगे भी जारी रखा जाए।

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