यूपी में बनेगा 330KM लंबा विंध्य एक्सप्रेस-वे, इन जिलों को खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क यात्रा और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने वाला है। प्रदेश सरकार ने विंध्य एक्सप्रेसवे के निर्माण की योजना पर काम शुरू कर दिया है। यह एक्सप्रेसवे करीब 330 किलोमीटर लंबा होगा और बनारस, चंदौली होते हुए सोनभद्र को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा।

इस परियोजना के सर्वे की जिम्मेदारी चेन्नई की अलमोंडज कंपनी को दी गई है। कंपनी की टीम पिछले कुछ दिनों से म्योरपुर और आसपास के क्षेत्रों में सर्वे कर रही है। टीम ने रनटोला के जंगलों से लेकर सोनभद्र तक पूरे मार्ग का निरीक्षण किया। सर्वे के दौरान हर 20 किलोमीटर पर सेटेलाइट कनेक्टिंग डिवाइस लगाकर मार्ग की पूरी जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार, एक्सप्रेसवे का अंतिम छोर रेणुकूट से मुर्धवा और रनटोला के जंगलों में समाप्त होगा।

मार्ग और कनेक्टिविटी

विंध्य एक्सप्रेसवे वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग के समानांतर बनेगा और यह पल्हारी के रास्ते गुजरेगा। रनटोला और मुर्धवा के बीच जंगलों से होकर यह दुद्धी-हाथीनाला मार्ग को पार करेगा और हरदी कोटा के कोन मार्ग से सोन नदी पर नए पुल के निर्माण के बाद इसे नगवां और चंदौली के रास्ते वाराणसी से जोड़ा जाएगा।

आपको बता दें की इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से सोनभद्र समेत प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित जिलों से अन्य शहरों और पड़ोसी राज्यों तक आवागमन अधिक सुगम और तेज होगा। इसके अलावा, व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में भी नए अवसर उत्पन्न होंगे।

आगामी योजना और लागत

अलमोंडज कंपनी के साइट इंचार्ज अरुण यादव ने बताया कि इस माह के अंत तक डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) शासन को सौंपी जाएगी। इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख होगा कि कुल परियोजना की लागत कितनी होगी और निर्माण पर कितना खर्च आएगा। माना जा रहा है कि 2027 से पहले एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष महाकुंभ मेले के समापन के समय इस परियोजना की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों से कनेक्टिविटी बेहतर बनाना है। विंध्य एक्सप्रेसवे के निर्माण से न केवल यात्रियों की यात्रा आसान होगी, बल्कि आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। यह परियोजना पूरे क्षेत्र के लिए सुगमता और विकास का मार्ग साबित होने जा रही है।

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