मुख्य सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद ने विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आपत्तियों का निस्तारण अनिवार्य रूप से 15 दिनों के भीतर किया जाए। इसके लिए प्रत्येक विकास प्राधिकरण को यह सुनिश्चित करना होगा कि विचाराधीन नक्शों की समीक्षा समय पर हो और यदि किसी नक्शे में त्रुटि या आपत्ति है तो उसके आवेदक और संबंधित आर्किटेक्ट के साथ बैठक कर समाधान किया जाए।
लोगों को राहत देने के लिए कैंप
नक्शा पास कराने वालों की सुविधा के लिए प्राधिकरणों में विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे। इन कैंपों में छोटे-मोटे सुधार और आपत्तियों का तत्काल निस्तारण किया जाएगा, ताकि आवेदकों को बार-बार अधिकारियों के चक्कर लगाने की आवश्यकता न पड़े।
गैर जरूरी एनओसी पर रोक
शासन ने यह भी निर्देश दिया है कि अनापत्ति प्रमाण पत्र केवल आवश्यक क्षेत्रों के लिए ही मांगे जाएं। उदाहरण के लिए, ग्रामों में शासकीय, नजूल, हेरिटेज भवन या अन्य संवेदनशील क्षेत्र प्रभावित होने पर ही एनओसी की मांग होगी। जिन क्षेत्रों में ऐसा कोई प्रभाव नहीं है, वहां एनओसी नहीं लिया जाएगा। इस कदम से नक्शा पास करने की प्रक्रिया तेज होगी और नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों से निजात मिलेगी।
उपविधि का पालन अनिवार्य
विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिया गया है कि नक्शों को मॉडल निर्माण एवं विकास उपविधि और जोनिंग रेगुलेशन-2025 के अनुसार ही पास किया जाए। समीक्षा में यह सामने आया कि दिसंबर 2025 तक प्रदेश के विकास प्राधिकरणों में कुल 2517 नक्शे जमा हुए, जिनमें से 596 पास, 373 अस्वीकृत, और 1544 विचाराधीन हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि अनावश्यक नक्शों को लटका कर रखने की अनुमति नहीं होगी।
योगी सरकार का यह फैसला नागरिकों के लिए समय और मेहनत की बचत के साथ-साथ प्रक्रिया को पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब आवेदक नक्शा पास कराने के लिए कम समय और सरल प्रक्रिया का लाभ उठा सकेंगे।
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