रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रणाली कई मामलों में रूस के चर्चित S-400 सिस्टम से भी अधिक प्रभावी साबित हो सकती है। आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) के प्रमुख अंकाथी राजू के अनुसार, इस परियोजना के तहत तीन अलग-अलग रेंज की मिसाइलें विकसित की जा रही हैं, जो मिलकर आसमान में तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार करेंगी।
तीन मिसाइल, एक अभेद्य सुरक्षा कवच
प्रोजेक्ट कुशा के अंतर्गत विकसित की जा रही मिसाइलों को M1, M2 और M3 नाम दिया गया है। इनका उद्देश्य अलग-अलग दूरी और ऊंचाई से आने वाले खतरों को रोकना है, जिससे किसी भी प्रकार का हवाई हमला नाकाम किया जा सके।
M1 इस सिस्टम की पहली परत होगी। इसकी अनुमानित मारक क्षमता 150 किलोमीटर है। जबकि M2 मिसाइल को पूरे एयर डिफेंस नेटवर्क की रीढ़ माना जा रहा है। इसकी रेंज करीब 250 किलोमीटर होगी। वहीं, M3 मिसाइल प्रोजेक्ट कुशा का सबसे शक्तिशाली हिस्सा है। इसकी घोषित रेंज 350 किलोमीटर है, जिसे भविष्य में 400 किलोमीटर तक बढ़ाने पर काम चल रहा है।
2028 तक हो सकता है पहला बड़ा परीक्षण
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, M3 मिसाइल का पहला परीक्षण 2028 तक किए जाने की संभावना है। इस दौरान इसके इंजन, गाइडेंस सिस्टम और रडार तकनीक को और उन्नत बनाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सफल परीक्षण के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास खुद का आधुनिक लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
प्रोजेक्ट कुशा भारत की ‘आत्मनिर्भर रक्षा नीति’ का मजबूत उदाहरण है। यह परियोजना न केवल विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा तकनीक के अग्रणी देशों की कतार में खड़ा कर देगी। ये चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के भी होश उड़ा देंगे।

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