पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने से पहले राज्य सरकार अन्य राज्यों के सफल मॉडल का अध्ययन कर रही है। इसी क्रम में पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल और दो वरिष्ठ इंजीनियरों को महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश भेजा गया है, ताकि वहां बने एक्सप्रेस-वे और उनकी कार्यप्रणाली को समझा जा सके।
रिपोर्ट मिलने के बाद यह तय किया जाएगा कि इन परियोजनाओं के लिए फंडिंग की व्यवस्था कैसे होगी और किन क्षेत्रों में राज्य सरकार सीधे तौर पर एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराएगी। योजना बनाते समय इस बात पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि कम से कम जमीन अधिग्रहण करना पड़े और एक एक्सप्रेस-वे कई जिलों को जोड़ने में सक्षम हो।
इस बीच, बिहार में केंद्र सरकार की ओर से भी चार एक्सप्रेस-वे परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। पटना–पूर्णिया एक्सप्रेस-वे को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है और उसे आधिकारिक नंबर भी आवंटित किया जा चुका है। वहीं, गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे को केंद्र की मंजूरी मिल चुकी है, जिसका बड़ा हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा।
इसके अलावा रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेस-वे बिहार के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे नेपाल को भी पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह से सीधी सड़क संपर्कता मिलेगी। चौथी बड़ी परियोजना वाराणसी–रांची–कोलकाता एक्सप्रेस-वे है, जिसका बिहार वाला हिस्सा लंबे समय तक जमीन अधिग्रहण के कारण अटका रहा, लेकिन अब इस पर दोबारा काम शुरू हो गया है।

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