टैक्स फ्री ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ी
जब महंगाई भत्ता बेसिक सैलरी के 50 प्रतिशत तक पहुंचा, तो ग्रेच्युटी की टैक्स फ्री सीमा को 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दिया गया। यह फैसला रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया और रिटायरमेंट प्लानिंग को ज्यादा सुरक्षित बनाया।
NPS में सरकार का बढ़ा योगदान
7वें वेतन आयोग के बाद राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में सरकार का योगदान 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया। साथ ही कर्मचारियों को निवेश विकल्प चुनने की ज्यादा स्वतंत्रता मिली। इससे NPS को लेकर कर्मचारियों का भरोसा बढ़ा और यह रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा।
इस आयोग में भत्तों की नई संरचना
इस वेतन आयोग ने सिर्फ सैलरी नहीं बढ़ाई, बल्कि भत्तों की पूरी व्यवस्था को नया रूप दिया। हाउस रेंट अलाउंस, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य विशेष भत्तों की समीक्षा की गई। कुछ भत्तों को खत्म किया गया, कुछ को जोड़ा गया और कुछ पर सीमा तय की गई। इससे कर्मचारियों की टेक होम सैलरी पोस्टिंग और कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग हो गई।
2.57 फिटमेंट फैक्टर बना गेमचेंजर
इस वेतन आयोग में लागू किया गया 2.57 का फिटमेंट फैक्टर हर कर्मचारी के लिए निर्णायक साबित हुआ। पुरानी बेसिक सैलरी को इसी फैक्टर से गुणा करके नई सैलरी तय की गई। यही वजह रही कि अलग-अलग लेवल पर सैलरी और पेंशन में बड़ा अंतर देखने को मिला और कुल आय में लंबी अवधि में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई।
बेसिक सैलरी में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
7वें वेतन आयोग की सबसे बड़ी खासियत बेसिक सैलरी में हुआ जबरदस्त इजाफा रहा। सबसे निचले लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 7 हजार रुपये से बढ़कर 18 हजार रुपये हो गई। वहीं शीर्ष स्तर पर यह बढ़ोतरी ढाई लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंची। इस बदलाव ने न सिर्फ सैलरी को बढ़ाया, बल्कि उससे जुड़े सभी भत्तों को भी नई ऊंचाई दी।
महंगाई भत्ता शून्य से 58% तक पहुंचा
परंपरा के अनुसार, 7वें वेतन आयोग के लागू होने पर महंगाई भत्ता (DA) शून्य से शुरू हुआ। समय के साथ महंगाई बढ़ने पर इसमें नियमित इजाफा होता गया और दस साल बाद यह 58 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता रहा।
यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) की शुरुआत
7वें वेतन आयोग के दौर में ही एक बड़ा बदलाव यह रहा कि अप्रैल 2025 से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) शुरू की गई। इसमें NPS और पुरानी पेंशन योजना की खूबियों को जोड़ा गया है। तय न्यूनतम पेंशन और महंगाई से जुड़ी सुरक्षा ने इसे कर्मचारियों के लिए आकर्षक विकल्प बना दिया।

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