1. निरा मुहिम
बालिकाओं और महिलाओं के लिए फ्री कॉटन रियूजेबल सेनेट्री पैड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ये पैड दो से ढाई साल तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं और पूरी तरह रीसाइकिल योग्य हैं। इससे महिलाओं का स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
2 .कन्या जन्मोत्सव
नवजात बालिकाओं के जन्म पर जन्म प्रमाण पत्र, बेबी किट, मोरिंगा का पौधा और सुंदर बेबी स्वैडल प्रदान किया जाएगा। साथ ही उन्हें सरकारी योजनाओं में तुरंत नामांकित किया जाएगा, ताकि परिवार को अलग-अलग दफ्तरों में चक्कर न लगाने पड़ें।
3 .बुनकर महिलाएं
पारंपरिक हुनर वाली बुनकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा रहा है। उन्हें रोजगार और बाज़ार उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि वे अपनी पहचान बना सकें।
4 .सांस अभियान
स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे नवजात शिशुओं के उपचार में सुधार होगा और नवजात मृत्यु दर में कमी आएगी।
5 .हर बेटी का सम्मान
मिशन शक्ति 5.0 के तहत खाप पंचायतों ने दहेज, ऑनर किलिंग और भ्रूण हत्या के खिलाफ एकजुट होने का संकल्प लिया। जिलाधिकारी ने कहा कि बेटियां समाज की असली शक्ति हैं। कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक के लिए कई अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए और मशीनें जब्त की गईं।
6 .किशोरी का पिटारा
इस पहल के तहत किशोरियाँ अपने संवेदनशील सवालों को कागज पर लिखकर एक बॉक्स में डालेंगी। प्रशिक्षित काउंसलर इन सवालों के वैज्ञानिक तरीके से जवाब देंगे, जिससे किशोरियों में जागरूकता बढ़ेगी।
7 .बेटी का नाम घर की शान
इस पहल के तहत घरों के बाहर बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगाई जा रही हैं। इसका उद्देश्य पितृसत्तात्मक सोच बदलना और संदेश देना है कि बेटी बोझ नहीं, बल्कि परिवार की पहचान और गौरव है।
8 .मेरी बेटी, मेरी कुल दीपक
इस अभियान के अंतर्गत उन परिवारों को सम्मानित किया जा रहा है जिनकी एक या दो बेटियां हैं। बेटियों को उपहार देकर यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि अवसर और संस्कार मिले, तो बेटियां समाज का उजाला बनती हैं।
9 .कार्यस्थल पर महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा
महिलाओं को कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से बचाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। बागपत में सार्वजनिक स्थलों पर ‘आंचल’ स्तनपान कक्ष की शुरुआत भी हुई है, जिससे कामकाजी और शिक्षार्थी महिलाओं को सुविधा और गरिमा मिल सके।

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