19 हजार किलोमीटर से ज्यादा सड़कों पर लागू होगी नई व्यवस्था
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में ओपीआरएमसी-3 (OPRMC-3) योजना को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत राज्य की 19,327 किलोमीटर सड़कों के रखरखाव के लिए एआई आधारित निगरानी प्रणाली और सख्त गुणवत्ता मानक लागू किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य है कि लोगों को बेहतर, सुरक्षित और सुगम सड़क सुविधा मिल सके।
सात साल के लिए लागू होगी ओपीआरएमसी-3 योजना
ओपीआरएमसी-2 की सफलता को देखते हुए सरकार ने इस योजना को नए रूप में सात वर्षों के लिए फिर से लागू करने का फैसला किया है। इस चरण में कुल 100 पैकेज बनाए गए हैं, जिनके जरिए बड़े पैमाने पर सड़कों का संधारण किया जाएगा। योजना की औसत लागत करीब 1.22 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है। इससे पहले 72 पैकेजों में 13,064 किलोमीटर सड़कों का रखरखाव किया जा रहा था, लेकिन इस बार दायरा कहीं ज्यादा व्यापक होगा।
पुल-पुलियों और जल निकासी पर भी खास ध्यान
नई योजना के तहत छह मीटर तक लंबी पुल-पुलियों का पूरा रखरखाव किया जाएगा। वहीं, इससे बड़े पुलों के मामले में केवल एप्रोच रोड, सड़क की परत (क्रस्ट) और शोल्डर का संधारण किया जाएगा। जल निकासी की समस्या से निपटने के लिए नाले निर्माण को सड़क की कुल लंबाई के एक प्रतिशत तक सीमित रखा गया है, ताकि संरचना संतुलित बनी रहे।
AI से होगी सड़कों की निगरानी
सड़कों में गड्ढे, दरार और अन्य खामियों की पहचान के लिए AI और मशीन लर्निंग आधारित सर्वे सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। इससे मानवीय लापरवाही कम होगी और संवेदकों (ठेकेदारों) को मरम्मत के लिए तेजी से प्रतिक्रिया देनी पड़ेगी। आपात स्थिति, वीवीआईपी मूवमेंट और प्राकृतिक आपदाओं के लिए अलग से प्रावधान भी किया गया है, जिसे निविदा प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा।
सड़क व्यवस्था में तकनीकी क्रांति
कुल मिलाकर, एआई तकनीक के इस्तेमाल से बिहार की सड़क व्यवस्था में एक नई तकनीकी क्रांति आने की उम्मीद है। इससे न केवल सड़कों की हालत सुधरेगी, बल्कि आम लोगों का सफर भी ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक बनेगा।

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