बंगाल चुनाव में खिलेगा कमल? सर्वे में युवा BJP के साथ

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल मई 2026 में समाप्त होने वाला है। ऐसे में राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है और सभी दलों की नजरें मार्च–अप्रैल 2026 में संभावित विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं। भले ही चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान नहीं किया हो, लेकिन सर्वे और राजनीतिक संकेतों ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

वोट शेयर में टीएमसी आगे, लेकिन चुनौती बरकरार

हालिया Vote Vibe सर्वे के अनुसार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस अभी भी सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। पार्टी को करीब 39.6 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान है। वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल 30.5 प्रतिशत वोट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर हैं। कांग्रेस और वाम दलों का गठबंधन इस दौड़ में काफी पीछे छूटता दिख रहा है, जिसे महज 7.3 प्रतिशत समर्थन मिलने की संभावना जताई गई है।

युवा मतदाताओं में भाजपा की पकड़

इस सर्वे का सबसे रोचक पहलू उम्र के आधार पर बदलता वोटिंग पैटर्न है। 18 से 24 वर्ष के युवा मतदाताओं में भाजपा को टीएमसी पर लगभग 7 प्रतिशत की बढ़त हासिल होती दिख रही है। यह संकेत देता है कि पहली बार या युवा मतदाता बदलाव की ओर झुकाव रख सकते हैं।

हालांकि जैसे-जैसे मतदाताओं की उम्र बढ़ती है, समीकरण बदल जाता है। मध्य आयु वर्ग में टीएमसी की पकड़ मजबूत होती जाती है और वरिष्ठ नागरिकों में ममता बनर्जी की लोकप्रियता सबसे ज्यादा दिखाई देती है। सीनियर सिटीजन्स के बीच टीएमसी को करीब 21 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है।

मुद्दों में बेरोजगारी सबसे ऊपर

वोटरों की प्राथमिकताओं की बात करें तो बेरोजगारी सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनकर उभरी है। लगभग 33.8 प्रतिशत लोगों ने इसे अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया। इसके बाद कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा (19.1 प्रतिशत) और भ्रष्टाचार (18.3 प्रतिशत) प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।

दिलचस्प बात यह है कि विकास जैसे मुद्दे को अपेक्षाकृत कम तवज्जो मिली है, जिसे केवल 10.2 प्रतिशत मतदाताओं ने अहम माना। वहीं सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को सिर्फ 3 प्रतिशत लोगों ने प्रमुख मुद्दा बताया, जो राजनीतिक नैरेटिव से अलग तस्वीर पेश करता है।

स्थानीय स्तर पर असंतोष के संकेत

सर्वे में यह भी सामने आया है कि मौजूदा विधायकों को लेकर मतदाताओं में पूरी संतुष्टि नहीं है। केवल 27 प्रतिशत लोग ही अपने वर्तमान विधायक को दोबारा चुनने के पक्ष में पूरी तरह तैयार हैं। दूसरी ओर, 25 प्रतिशत मतदाता सीधे तौर पर मौजूदा MLA से नाराज हैं। इसके अलावा एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो पार्टी से तो खुश है, लेकिन उम्मीदवार बदलने की इच्छा रखता है।

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