बिहार मॉडल पर भरोसा, बड़े नेताओं को जिम्मेदारी
बंगाल में चुनावी अभियान की कमान राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के अनुभवी नेताओं को सौंपी गई है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन, चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव और बंगाल प्रभारी मंगल पांडे इस पूरी रणनीति की निगरानी कर रहे हैं। खास बात यह है कि जिन नेताओं को बंगाल में संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है, उनका सीधा या परोक्ष जुड़ाव बिहार से रहा है।
उत्तरी बंगाल बना BJP का फोकस एरिया
बीजेपी की रणनीति का केंद्र उत्तरी बंगाल है, जहां 31 विधानसभा सीटें और 6 लोकसभा क्षेत्र आते हैं। पार्टी ने इन इलाकों के लिए अलग से ब्लूप्रिंट तैयार किया है। आने वाले दिनों में बैठक के बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं की तैनाती कर दी जाएगी, जो तय लक्ष्य से अधिक सीटें जीतने के मिशन पर काम करेंगे।
सीमावर्ती इलाकों पर विशेष नजर
योजना के तहत बिहार के वरिष्ठ नेता, संगठन पदाधिकारी और अनुभवी कार्यकर्ताओं को चरणबद्ध तरीके से पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा है। सीमावर्ती जिले, शहरी क्षेत्र और प्रवासी बिहारी मतदाताओं वाले इलाकों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। पार्टी इन क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर संगठन को और मजबूत करना चाहती है।
पांच जोन में बंटेगा पश्चिम बंगाल
पार्टी पश्चिम बंगाल को पांच जोन में बांटने की योजना पर काम कर रही है। आसनसोल, दुर्गापुर और सिलीगुड़ी जैसे इलाके खासतौर पर फोकस में हैं, जो बिहार की सीमा से सटे हैं। हर विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र में एक प्रभारी होगा, जबकि प्रत्येक जोन के लिए अलग संयोजक नियुक्त किए जाएंगे।
चुनावी मुद्दों की प्राथमिकता
बीजेपी का चुनावी एजेंडा स्पष्ट है। पार्टी कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। बिहार बीजेपी के नेता लगातार बंगाल का दौरा कर स्थानीय नेतृत्व के साथ तालमेल बैठा रहे हैं।
2026 में होगा मुकाबला
294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुनाव मार्च–अप्रैल 2026 में होने की संभावना है। 2021 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया था, जबकि बीजेपी मुख्य विपक्ष के रूप में उभरी थी। अब पार्टी बिहार मॉडल के सहारे बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर करने की तैयारी में है।
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