भारत बना रहा S-400 का 'बाप', चीन-पाक के उड़े होश!

नई दिल्ली। भारत अब अपनी वायु सुरक्षा को पूरी तरह स्वदेशी और अभेद्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा चुका है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के नेतृत्व में चल रहा ‘प्रोजेक्ट कुशा’ देश को लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम में आत्मनिर्भर बनाने का मिशन है। यह प्रणाली न केवल रूस के अत्याधुनिक S-400 की बराबरी करेगी, बल्कि कई तकनीकी पहलुओं में उससे आगे निकलने की क्षमता भी रखेगी।

तीन परतों में बनेगा भारत का एयर शील्ड

प्रोजेक्ट कुशा के तहत भारत एक तीन-स्तरीय वायु रक्षा कवच विकसित कर रहा है। इसके अंतर्गत M1, M2 और M3 नाम की तीन अलग-अलग मिसाइलें तैयार की जा रही हैं, जो मिलकर दुश्मन के लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक खतरों और ड्रोन हमलों को आसमान में ही नष्ट कर देंगी। यह सिस्टम कम दूरी से लेकर बेहद लंबी दूरी तक के खतरों से निपटने में सक्षम होगा।

इस परियोजना की पहली कड़ी M1 मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 150 किलोमीटर होगी। जबकि M2 मिसाइल को इस एयर डिफेंस ढांचे की मुख्य ताकत माना जा रहा है। इसकी अनुमानित रेंज 250 किलोमीटर होगी। वहीं, प्रोजेक्ट कुशा का सबसे शक्तिशाली हथियार M3 मिसाइल होगी। इसकी आधिकारिक रेंज करीब 350 किलोमीटर तय की गई है, जिसे भविष्य में 400 किलोमीटर तक बढ़ाने पर काम चल रहा है।

2028 तक पहले परीक्षण की उम्मीद

रिपोर्ट्स के अनुसार, M3 मिसाइल का पहला परीक्षण 2028 तक किया जा सकता है। इससे पहले इसके इंजन, रडार सिस्टम और गाइडेंस तकनीक को और अधिक उन्नत किया जाएगा, ताकि यह वैश्विक स्तर के सर्वश्रेष्ठ एयर डिफेंस सिस्टम को टक्कर दे सके।

आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम

प्रोजेक्ट कुशा भारत की रक्षा नीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। इस परियोजना की सफलता के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जिनके पास अपना स्वदेशी लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है। इससे न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि भारत वैश्विक रक्षा तकनीक के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाएगा।

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