विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ोतरी में मुख्य योगदान पश्चिम एशियाई देशों के साथ हुए फ्री ट्रेड समझौतों और सर्विसेज व इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे टेक्नोलॉजी-आधारित क्षेत्र देंगे। डिजिटल सेवाओं के मामले में भारत पहले ही विश्व के शीर्ष देशों में शामिल है, जहां अमेरिका पहले, यूके दूसरे, आयरलैंड तीसरे और जर्मनी चौथे स्थान पर है।
टैरिफ का प्रबंधन
अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% के भारी टैरिफ का उद्योग ने अपने हिसाब से समाधान ढूंढ लिया है। अमेरिका ने पहले भारत पर 25% टैरिफ लगाया था, जबकि रूस से तेल आयात के लिए अतिरिक्त 25% टैरिफ लागू किया गया था। लेकिन फिर भी अगले साल टेक्सटाइल और अन्य निर्यात में 10-20% की बढ़ोतरी की उम्मीद है।
इसका मुख्य कारण भारत और यूके के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड डील, जीएसटी में कटौती, क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर का हटना और ड्यूटी-फ्री कॉटन जैसी घरेलू पहलें हैं। इसी तरह, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन चुकी है।
निर्यात में नए रिकॉर्ड के संकेत
वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से नवंबर तक भारत का निर्यात 562 अरब डॉलर के पार गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 533 अरब डॉलर से लगभग 5.4% अधिक है। इस वृद्धि में टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेवाओं के क्षेत्र ने प्रमुख योगदान दिया है।
भारत ने 2025 में तीन महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते भी अंतिम रूप दे दिए। इनमें यूके और ओमान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर और न्यूजीलैंड के साथ व्यापारिक बातचीत शामिल हैं। भारत और यूके के बीच प्रस्तावित कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) 2026 में लागू होने की संभावना है।

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