रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की नाराजगी
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस के तेल निर्यात पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए। इसके बावजूद भारत ने रूस से सस्ते दामों पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा, जिससे रूस को आर्थिक राहत मिली। अमेरिका का आरोप है कि इस तेल से मिलने वाली आमदनी रूस के युद्ध प्रयासों को मजबूत कर रही है। हालांकि भारत ने बीते छह महीनों में रूस से तेल आयात घटाया है और जनवरी में यह चार साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, फिर भी अमेरिका इस कदम से संतुष्ट नहीं दिख रहा।
500% टैरिफ वाला कानून और रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक ऐसे विधेयक को मंजूरी दी है, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। यह कदम भारत जैसे देशों पर सीधा दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
वेनेजुएला के तेल का प्रस्ताव
तनाव के बीच अमेरिका ने भारत को एक बड़ा ऑफर दिया है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अमेरिका एक नियंत्रित ढांचे (कंट्रोल्ड फ्रेमवर्क) के तहत भारत और चीन को वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। इस योजना के तहत अमेरिका वेनेजुएला में भंडारित 3 से 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल को वैश्विक बाजार में उतारना चाहता है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है और भारत की कई रिफाइनरियां इस भारी क्रूड को प्रोसेस करने में सक्षम हैं।
भारतीय कंपनियों की रुचि
भारत की प्रमुख निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने संकेत दिया है कि वह वेनेजुएला से तेल खरीदने को तैयार है, बशर्ते नियमों में स्पष्टता हो। इसके अलावा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, नायरा एनर्जी और मैंगलोर रिफाइनरी जैसी सरकारी व निजी कंपनियां भी पहले वेनेजुएला का तेल खरीद चुकी हैं।
टैरिफ घटाने का संकेत
संकेत दिए गए हैं कि यदि भारत रूस से तेल खरीद कम करता है और वेनेजुएला से आयात बढ़ाता है, तो अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ को घटाकर 25 प्रतिशत तक ला सकता है। यह प्रस्ताव भारत के लिए आर्थिक राहत का कारण बन सकता है, लेकिन इसके रणनीतिक परिणाम भी होंगे।
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