सात साल से नहीं दिया योजना का हिसाब
जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2017-18 में मुख्यमंत्री परिभ्रमण योजना के अंतर्गत जिले के प्रत्येक स्कूल को 20-20 हजार रुपये की राशि दी गई थी। इस तरह कुल 16 लाख 40 हजार रुपये का हिसाब अब तक लंबित है। बावजूद इसके, संबंधित हेडमास्टरों द्वारा विभाग को अब तक डीसी विपत्र जमा नहीं कराया गया।
विशेष कैंप भी रहा बेअसर
लंबित विपत्र जमा कराने के उद्देश्य से 8 जनवरी को अंतिम चेतावनी के साथ एक विशेष कैंप का आयोजन किया गया था। हालांकि इस कैंप में भी केवल 6 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने ही आवश्यक कागजात जमा कराए। शेष स्कूलों के एचएम या तो अनुपस्थित रहे या फिर आदेश को नजरअंदाज करते दिखे।
वेतन कटौती का सख्त आदेश
इस लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए डीईओ राघवेंद्र मणि त्रिपाठी ने डीपीओ स्थापना को निर्देश दिया है कि जिन हेडमास्टरों ने डीसी विपत्र जमा नहीं किया है, उन्हें 8 जनवरी को अनुपस्थित मानते हुए उनके वेतन से कटौती की जाए। कटौती की गई राशि को कोषागार में जमा कराया जाएगा और इसकी एंट्री सेवा पुस्तिका में भी की जाएगी।
कई प्रखंडों के स्कूल चिह्नित
इस कार्रवाई की जद में जिले के कई प्रखंडों के स्कूल आए हैं। इनमें बाजपट्टी, बथनाहा, बेलसंड, बोखड़ा, डुमरा, मेजरगंज, नानपुर, परिहार, रुन्नीसैदपुर, सोनबरसा, सुप्पी और सुरसंड जैसे प्रखंडों के स्कूल शामिल हैं। सबसे अधिक मामले रुन्नीसैदपुर प्रखंड से सामने आए हैं, जहां के 30 स्कूलों के हेडमास्टर अब तक हिसाब नहीं दे पाए हैं।
डीसी विपत्र जमा होने तक कटेगी सैलरी
शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि जब तक डीसी विपत्र जमा नहीं होगा, तब तक संबंधित हेडमास्टरों की सैलरी दिन के हिसाब से काटी जाती रहेगी। विभाग ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए आगे और कड़ी कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं।

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