बुंदेलखंड में सूखे से राहत की उम्मीद
बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से जल संकट और सूखे की समस्या से प्रभावित रहा है। इस क्षेत्र के महोबा, हमीरपुर और बांदा जिलों को कवर करने वाली अर्जुन सहायक नहर परियोजना के लिए 1,353.86 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस परियोजना के पूरा होने से सिंचाई क्षमता में बढ़ोतरी होगी, जिससे किसानों को बारिश पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और खेती अधिक स्थिर बन सकेगी।
पूर्वांचल में जल संकट का समाधान
पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हर साल या तो जल की कमी या फिर बाढ़ की समस्या देखने को मिलती है। सरयू नहर परियोजना के लिए 1,899.35 करोड़ रुपये की स्वीकृति इसी चुनौती का समाधान है। इस योजना का लाभ बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, बस्ती, संतकबीरनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर और गोरखपुर जैसे जिलों को मिलेगा। सरयू, राप्ती, बाणगंगा और रोहिणी नदियों के अतिरिक्त पानी को व्यवस्थित रूप से कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे न केवल जल संकट कम होगा बल्कि फसल उत्पादन में भी वृद्धि होगी।
पश्चिमी यूपी में बाढ़ नियंत्रण पर जोर
संभल, मुरादाबाद और अमरोहा क्षेत्रों में गंगा बेसिन से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए मध्य गंगा नहर परियोजना के दूसरे चरण के लिए 3,178.04 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इस परियोजना से बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ सिंचाई ढांचे को मजबूत किया जाएगा, जिससे किसानों को समय पर पानी मिल सकेगा और फसल क्षति में कमी आएगी।
देशव्यापी योजना का हिस्सा
यह पहल केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। नाबार्ड के सहयोग से केंद्र सरकार देश के 18 राज्यों में कुल 99 मध्यम और बड़ी सिंचाई परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर उपयोग, कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाना और ग्रामीण विकास को गति देना है।

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