चीन का दबदबा खत्म, भारत-अमेरिका साथ, बड़ी बैठक!

नई दिल्ली। भारत ने वैश्विक खनिज सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव रविवार को वाशिंगटन डीसी पहुंचे, जहां वो अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट द्वारा आयोजित जी-7 वित्त मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। इस बैठक में मुख्य चर्चा का विषय क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ (दुर्लभ खनिज) हैं।

जी-7 बैठक और भारत की भूमिका

जी-7 में अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन शामिल हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ और अन्य आमंत्रित देशों जैसे भारत और ऑस्ट्रेलिया ने भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के लिए सुरक्षित खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

चीन का वैश्विक दबदबा

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की रिपोर्ट के अनुसार, चीन तांबा, लिथियम, निकल, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और दुर्लभ खनिजों में दुनिया का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करता है। इस पर पश्चिमी देशों की उच्च निर्भरता अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा में खतरे का कारण बन रही है।

भारत की रणनीति

भारत ने इस पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू खोज और उत्पादन को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) 2025 के तहत जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने 195 नए प्रोजेक्ट्स शुरू किए हैं। सरकार का लक्ष्य कोबाल्ट, निकेल और अन्य दुर्लभ खनिजों में आयात पर निर्भरता कम करना और देश में मैन्युफैक्चरिंग ईकोसिस्टम तैयार करना है।

नीलामी और बजट

खनिज सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 100 से अधिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की तैयारी की है। इसके लिए 7,280 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिससे भारत का घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम मजबूत होगा। इसके अलावा, भारत रूस के साथ मिलकर भी नए खनिज प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।

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