भारत का बड़ा कदम, कराह उठे ट्रंप, अमेरिका को झटका!

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संभावित ट्रेड डील पर अड़चनें पैदा हो गई हैं। अमेरिका का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन नहीं किया, इसलिए डील अटक गई। लेकिन भारत की ओर से स्पष्ट किया गया है कि साल 2025 में भारत ने अमेरिका के साथ 8 बार ट्रेड डील पर बातचीत की, और देशहित सर्वोपरि होने के कारण कोई भी समझौता मनमाने शर्तों पर नहीं किया गया।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का बड़ा कदम

ट्रंप की नाराजगी की असली वजह सिर्फ डील नहीं है, बल्कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का निवेश रणनीति में बदलाव है। चार साल में पहली बार RBI ने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में निवेश घटाया। अक्टूबर 2025 तक अमेरिकी बॉन्ड में निवेश 240 अरब डॉलर से घटकर 190 अरब डॉलर रह गया। रिजर्व बैंक ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि वैश्विक स्तर पर युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है। अमेरिका पर बढ़ता कर्ज और डॉलर पर निर्भरता के जोखिम को देखते हुए RBI ने सोने में निवेश बढ़ाने का निर्णय लिया।

सोने में बढ़ता निवेश

अमेरिकी बॉन्ड से पैसा निकालकर RBI ने सोना खरीदना शुरू किया, जिससे भारत के सोने का भंडार बढ़कर 880 टन हो गया। कुल फॉरेक्स रिजर्व में सोने का हिस्सा 9% से बढ़कर 14% तक पहुंच गया। सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है और किसी भी वैश्विक संकट में इसकी कीमत आमतौर पर स्थिर रहती है।

वैश्विक परिदृश्य

भारत ही नहीं, चीन, ब्राजील, हांगकांग और सऊदी अरब के केंद्रीय बैंक भी अमेरिकी बॉन्ड में निवेश कम कर रहे हैं। इसका मकसद अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित और स्थिर रखना है। इस बदलाव से डॉलर की वैश्विक प्रभुसत्ता पर असर पड़ा है। डॉलर की वैश्विक फॉरेक्स रिजर्व में हिस्सेदारी गिरकर 40% हो गई है, जो पिछले 20 साल में सबसे कम है। जबकि सोने में विश्वास बढ़कर 28% हो गया।

ट्रंप की नाराजगी की वजह

अमेरिका का दबदबा घटने और डॉलर की वैश्विक प्रभुसत्ता पर असर डालने वाले कदम ट्रंप की नाराजगी का मुख्य कारण हैं। भारत सहित कई देश अब सोने को सुरक्षित निवेश मानते हुए अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी घटा रहे हैं। यही कारण है कि ट्रंप अलग-अलग मौके पर भारत और अन्य देशों की नीतियों पर नाराजगी जता रहे हैं।

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