फरवरी 2026 से पूरी तरह ऑनलाइन व्यवस्था
सरकार ने इस योजना को फरवरी 2026 तक पूर्ण डिजिटल स्वरूप देने का लक्ष्य रखा है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से एक अत्याधुनिक वेब पोर्टल और सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है। इसके जरिए आवेदन, दस्तावेज अपलोड, सत्यापन और भुगतान सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन होंगी। इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि कागजी कार्यवाही और अनावश्यक देरी भी समाप्त हो जाएगी।
किसानों को अब मिलेगा घर बैठे लाभ
अब तक योजना में ऑनलाइन आवेदन के बाद भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसान अपने मोबाइल या कंप्यूटर से ही आवेदन कर सकेंगे और उसकी स्थिति को रियल टाइम में ट्रैक भी कर पाएंगे। इससे तहसील और जिला कार्यालयों की भागदौड़ खत्म होगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी काफी हद तक कम होंगी।
संकट की घड़ी में ₹5 लाख तक की मदद
2019 में शुरू की गई यह योजना दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में किसान परिवारों को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान करती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और सहायता समय पर मिलती है।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले मंडल
राजस्व परिषद की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 तक प्रदेश में लगभग 29 हजार से अधिक किसानों के आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं। मंडलवार आंकड़ों में लखनऊ मंडल सबसे आगे है, जबकि गोरखपुर, अयोध्या और कानपुर मंडल भी बेहतर प्रदर्शन करने वालों में शामिल हैं। यह दर्शाता है कि योजना का लाभ तेजी से किसानों तक पहुंच रहा है।
पारदर्शी शासन की मिसाल
यह डिजिटल पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस कार्यशैली को दर्शाती है, जिसमें तकनीक के माध्यम से आम नागरिकों, खासकर किसानों, को सशक्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र किसान सहायता से वंचित न रहे और उसे बिना किसी बाधा के समय पर आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

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