क्यों अटका था भुगतान?
बिहार राज्य चीनी निगम में कभी 15,481 कर्मचारी कार्यरत थे। 1990 के दशक में निगम की सभी चीनी मिलें बंद हो गईं, जिसके बाद कर्मचारियों का वेतन, भत्ता और पेंशन भुगतान भी ठप हो गया। समय बीतने के साथ बकाया राशि बढ़ती चली गई। कर्मचारियों ने आंदोलन किए, मामला अदालत तक पहुंचा, लेकिन वर्षों तक समाधान नहीं निकल पाया।
नीतीश सरकार ने लिया फैसला
राज्य में नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद चीनी निगम कर्मियों के बकाये भुगतान का निर्णय लिया गया। इसके तहत सरकार ने 294.73 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की। इसमें से 5 करोड़ रुपये भविष्य निधि (PF) के लिए निर्धारित किए गए। अब तक 11,301 कर्मचारियों को उनके वेतन और भत्तों का भुगतान किया जा चुका है, जिन पर 226.48 करोड़ रुपये खर्च किए गए। लेकिन शेष 4180 कर्मचारी अब भी अपने हक की रकम से वंचित हैं।
अब बचे कर्मियों की तलाश होगी
गन्ना उद्योग विभाग के अनुसार, शेष कर्मचारियों या उनके आश्रितों तक पहुंचने के लिए फिर से सूचना एकत्र करने और पहचान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए विभाग सार्वजनिक विज्ञापन जारी करने पर भी विचार कर रहा है, ताकि कोई भी पात्र कर्मचारी या उसके परिजन भुगतान से वंचित न रह जाएं।
ईंखायुक्त अनिल झा ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि सभी पात्र कर्मचारियों या उनके परिवारों को उनका बकाया भुगतान हर हाल में मिले। इसके लिए विभाग स्तर पर ठोस निर्णय लेने पर विचार किया जा रहा है।

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