जीपीएस आधारित रोवर से होगी पैमाइश
राजस्व परिषद अब जमीन की पैमाइश के लिए जीपीएस आधारित रोवर मशीन का इस्तेमाल करेगी। यह आधुनिक उपकरण सैटेलाइट और सर्वे ऑफ इंडिया के डाटा के जरिए किसी भी भूमि की सटीक पैमाइश करने में सक्षम होगा। खास बात यह है कि इसके लिए गांव के सीमा स्तंभों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। रोवर तकनीक से जमीन की पैमाइश करीब पांच सेंटीमीटर तक की सटीकता के साथ की जा सकेगी। साथ ही, उसी समय जमीन का डिजिटल नक्शा भी तैयार किया जा सकेगा।
हर तहसील में बनेगी विशेष टीम
नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए हर तहसील स्तर पर विशेष टीम का गठन किया जाएगा। इस टीम में एक नायब तहसीलदार, दो कानूनगो, और दो लेखपाल शामिल होंगे। राजस्व परिषद इस तकनीक के उपयोग के लिए एक विस्तृत एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) भी तैयार कर रही है, ताकि पैमाइश की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और एक समान हो।
तेजी से निपटेंगे जमीन विवाद
रोवर मशीन के जरिए पैमाइश में केवल 5 से 10 मिनट का समय लगेगा। इससे वर्षों से लंबित जमीन से जुड़े मामलों का निस्तारण तेजी से किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही राजस्व वादों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दे चुके हैं और यह तकनीक उस दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।
पायलट प्रोजेक्ट में सफलता
राजस्व परिषद के अध्यक्ष अनिल कुमार के अनुसार, इस तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट के तहत कई गांवों में सफल परीक्षण किया जा चुका है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है। नए साल में इस व्यवस्था के शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
सटीकता और पारदर्शिता दोनों पर जोर
प्रदेश की सभी तहसीलों के लिए लगभग 350 रोवर मशीनें खरीदी जाएंगी, जिनकी अनुमानित कीमत 6 से 7 लाख रुपये प्रति मशीन बताई जा रही है। इस निवेश से जमीन की पैमाइश में त्रुटि की गुंजाइश खत्म होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
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