फास्टपास क्या है?
फास्टपास एक ऑटोमेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो भवन मानचित्र की जाँच करता है और स्वीकृति प्रक्रिया को तेज बनाता है। 100 वर्ग मीटर तक के घर और 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक भवनों के लिए यह सुविधा उपलब्ध है। मालिक या रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट नक्शा अपलोड करते हैं और सिस्टम स्वतः जांच कर अप्रूवल जारी कर देता है।
आवेदन की प्रक्रिया आसान
पोर्टल map.up.gov.in पर जाएँ और नया अकाउंट बनाएं या लॉगिन करें। आधार ई-केवाईसी करें। भूखंड की जानकारी और नक्शा अपलोड करें। ऑनलाइन फीस जमा करें। सिस्टम स्वचालित रूप से नक्शे की जाँच करेगा और तुरंत अप्रूवल देगा।
क्या है इस व्यवस्था के फायदे?
इस डिजिटल सिस्टम से आवेदन की लागत पहले 40-50 हजार रुपये तक होने की जगह अब सिर्फ 5-7 हजार रुपये होगी। छोटे प्लॉट मालिक, मध्यम वर्ग और छोटे व्यवसायियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। इसके अलावा, अवैध निर्माण पर भी नियंत्रण बढ़ेगा क्योंकि मानक नक्शा जरूरी होगा।
क्या है ध्यान देने योग्य बातें?
आवेदन करते समय भूखंड का विवरण मास्टर प्लान से मेल खाना चाहिए। सड़क चौड़ाई, सेटबैक, पार्किंग और फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) सही दर्ज करना जरूरी है। बड़े प्रोजेक्ट या विशेष नियमों के लिए LDA की हेल्पलाइन से संपर्क किया जा सकता है। फास्टपास सिस्टम से लखनऊवासियों को अब छोटे निर्माण के लिए समय और पैसा दोनों की बचत होगी, और निर्माण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल बन जाएगी।
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