सुपरपावर दोस्ती: भारत-रूस की जोड़ी दिखाएगी ताकत

नई दिल्ली। वैश्विक भू-राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच भारत और रूस एक बार फिर अपनी मजबूत रणनीतिक साझेदारी का संदेश देने जा रहे हैं। दोनों देश फरवरी में हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करने की तैयारी में हैं। यह अभ्यास न सिर्फ सैन्य सहयोग को मजबूती देगा, बल्कि दुनिया को यह भी दिखाएगा कि भारत–रूस की दोस्ती आज भी उतनी ही प्रभावशाली और भरोसेमंद है।

बंगाल की खाड़ी में होगा शक्ति प्रदर्शन

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और रूस का यह संयुक्त नौसैनिक अभ्यास बंगाल की खाड़ी में आयोजित किया जाएगा। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS के मुताबिक, रूसी नौसेना के प्रशांत बेड़े का एक फ्रिगेट इस अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए ओमान के मस्कट बंदरगाह से रवाना होगा। यह युद्धपोत 18 से 25 फरवरी के बीच भारतीय बंदरगाह विशाखापत्तनम का अनौपचारिक दौरा भी करेगा, जहां दोनों देशों की नौसेनाएं आपसी समन्वय और रणनीतिक अभ्यास करेंगी।

‘इंद्र’ अभ्यास की परंपरा को आगे बढ़ाएगा

भारत और रूस के बीच हर साल आयोजित होने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘इंद्र’ दोनों देशों की रक्षा साझेदारी की पहचान बन चुका है। नौसेना, थलसेना और वायुसेना स्तर पर होने वाले इन अभ्यासों का उद्देश्य सामरिक तालमेल बढ़ाना और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना है। आगामी नौसैनिक अभ्यास को इसी दीर्घकालिक सैन्य सहयोग की अगली कड़ी माना जा रहा है।

भारत-रूस मिलकर समुद्री सुरक्षा का मजबूत संदेश

हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है। ऐसे में भारत और रूस का संयुक्त अभ्यास यह संकेत देता है कि दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अभ्यास उन शक्तियों के लिए भी संदेश है जो समुद्री इलाकों में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

भारत–रूस संबंध केवल सैन्य साझेदारी तक सीमित नहीं हैं। मॉस्को में भारत के राजदूत विनय कुमार ने हाल ही में कहा कि दोनों देश 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार, हाल के वर्षों में व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है और उर्वरक, कृषि, इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में नए अवसर सामने आए हैं।

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