राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए कंसल्टेंट के चयन की निविदा प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दे दी है। चयन इस आधार पर किया जाएगा कि कार्बन क्रेडिट की बिक्री से होने वाली आय में कंसल्टेंट सरकार को न्यूनतम कितना शेयर देगा। खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में निदेशालय पर किसी प्रकार का वित्तीय भार नहीं आएगा।
कार्बन क्रेडिट से मिलेगा अतिरिक्त राजस्व
परियोजना के तहत इलेक्ट्रिक बसों से होने वाली उत्सर्जन में कमी का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्बन क्रेडिट अर्जित किए जाएंगे, जिन्हें बाजार में बेचा जाएगा। इससे प्राप्त होने वाली राशि को नॉन-फेयर बॉक्स रेवेन्यू के रूप में उपयोग किया जाएगा, जिससे शहरी परिवहन प्रणाली को आर्थिक मजबूती मिलेगी।
1225 नई इलेक्ट्रिक बसों की होगी खरीद
योगी सरकार ने प्रदेश के शहरों में सार्वजनिक परिवहन को और आधुनिक बनाने के लिए 1225 नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें खरीदने का भी फैसला किया है। ये बसें मौजूदा समय में चल रही 1140 डीजल और सीएनजी बसों की जगह लेंगी। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि यात्रियों को आरामदायक और स्वच्छ यात्रा का अनुभव भी मिलेगा।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती
इलेक्ट्रिक बसों के सुचारु संचालन के लिए चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार भी तेज़ी से किया जाएगा। प्रदेश के 16 नगर निगमों में कुल 272 पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा सारनाथ स्थित पार्किंग स्थल पर द्वितीय अवसर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने और दो नए चार्जर लगाने के लिए 103.53 लाख रुपये के प्रारंभिक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। चार्जिंग स्टेशनों के विकास की जिम्मेदारी यूपीआरईवी को सौंपी गई है, जो उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की इकाई है और प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का कार्य कर रही है।

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