मुख्य सचिव ने जारी किए स्पष्ट निर्देश
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की ओर से सभी विभागाध्यक्षों, कार्यालय प्रमुखों और शासन स्तर के अधिकारियों को इस संबंध में आदेश भेजा गया है। आदेश में साफ कहा गया है कि कोई भी कर्मचारी या अधिकारी इस प्रक्रिया से बाहर नहीं रहेगा और सभी को नियमानुसार अपनी संपत्ति की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करनी होगी।
नियमावली के तहत अनिवार्यता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के अंतर्गत लागू की गई है। इसके अनुसार, प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को समय-समय पर अपनी अर्जित संपत्ति का विवरण विभाग को देना अनिवार्य होता है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
वेतन रोकने का भी है प्रावधान
शासनादेश में यह भी साफ किया गया है कि जो अधिकारी या कर्मचारी 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति का विवरण अपलोड नहीं करेंगे, उनका जनवरी माह का वेतन आहरण-वितरण अधिकारी (DDO) द्वारा रोक दिया जाएगा। वेतन तब तक जारी नहीं होगा, जब तक आवश्यक जानकारी पोर्टल पर दर्ज नहीं कर दी जाती।
नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी
इस आदेश के पालन की जिम्मेदारी संबंधित विभागों के नोडल अधिकारियों और आहरण-वितरण अधिकारियों को सौंपी गई है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके विभाग के सभी कर्मचारी समय पर संपत्ति विवरण दर्ज करें।
लाखों कर्मचारियों पर लागू आदेश
प्रदेश में सभी श्रेणियों को मिलाकर करीब 8.74 लाख सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं। इन सभी को 31 दिसंबर 2025 तक अर्जित अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा निर्धारित समय सीमा के भीतर मानव संपदा पोर्टल पर देना होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और वित्तीय अनुशासन को मजबूती मिलेगी।
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