यूपी में रोलर फ्लोर मिलों को बढ़ावा, किसानों की होगी बल्ले बल्ले

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार कृषि और उद्योग के बीच मजबूत सेतु बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि राज्य की सभी रोलर फ्लोर मिलें पूरी क्षमता के साथ संचालित हों, साथ ही खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े नए उद्योग भी स्थापित किए जाएं। इससे न सिर्फ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि किसानों को अपनी उपज का बेहतर और स्थायी बाजार भी मिल सकेगा।

यह बात प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने उत्तर प्रदेश रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक वर्कशॉप के दौरान कही। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता उत्तर प्रदेश को जल्द ही एक अग्रणी उत्पादक राज्य के रूप में स्थापित करने की है, ताकि आर्थिक विकास को नई रफ्तार दी जा सके।

गेहूं खरीद पर मंडी शुल्क में राहत की मांग

कार्यक्रम के दौरान एसोसिएशन की ओर से सरकार के सामने यह मांग रखी गई कि फ्लोर मिलों द्वारा गेहूं की खरीद पर बिना शर्त मंडी शुल्क से छूट दी जाए। उद्योग जगत का मानना है कि इससे मिलों की उत्पादन लागत घटेगी और वे अधिक मात्रा में गेहूं खरीद सकेंगी, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा।

उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल

कार्यक्रम के संयोजक और राज्य परिवर्तन आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि बेहतर सड़कें, एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डों का विस्तार और मजबूत कानून-व्यवस्था के चलते उत्तर प्रदेश तेजी से उद्योगों के लिए आकर्षक राज्य बन रहा है। यही वजह है कि देश-विदेश के निवेशक यहां निवेश के लिए रुचि दिखा रहे हैं।

गेहूं उत्पादन में नंबर वन

एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक कुमार बजाज ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश में गेहूं उत्पादन में पहले स्थान पर है, जहां सालाना करीब 360 लाख टन गेहूं पैदा होता है। इसके बावजूद राज्य की 350 से अधिक फ्लोर मिलें अपनी कुल क्षमता का सिर्फ 35 से 40 प्रतिशत ही उपयोग कर पा रही हैं। यदि नीतिगत सहयोग मिले, तो यह क्षमता कई गुना बढ़ाई जा सकती है। सभी ने एक स्वर में माना कि यदि फ्लोर मिल उद्योग को मजबूती दी गई, तो इसका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

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