उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को योजना भवन में प्रदेश भर के मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) के साथ बैठक की और मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार महिलाओं को केवल स्वरोजगार तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी के रूप में स्थापित करना चाहती है।
महिलाओं को मिलेगी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान
सरकार का लक्ष्य पहले चरण में एक करोड़ महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाना है। इसके बाद उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार उपलब्धता और ब्रांडिंग के माध्यम से 'करोड़पति दीदी' बनने में मदद दी जाएगी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं पहले से ही सक्षम हैं, और उनके उत्पादों में वैश्विक बाजार में प्रवेश की बड़ी संभावनाएं हैं।
यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौतों का लाभ उठाते हुए, उत्तर प्रदेश की स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अपने उत्पादों को यूरोप तक पहुंचा सकेंगी। उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि उत्तर प्रदेश की दीदियों के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाएं।
स्थानीय व्यंजन और रोजगार के नए अवसर
योजना के तहत 'एक जिला-एक व्यंजन' पहल भी लागू की जाएगी। इसके अंतर्गत प्रत्येक जिले में विशेष कैंटीन स्थापित की जाएंगी, जहाँ स्थानीय व्यंजन बेचे जाएंगे। इससे न केवल महिलाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि स्थानीय व्यंजनों को बाजार भी मिलेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस योजना को पूरी निष्ठा से लागू करें।
सौर ऊर्जा के माध्यम से प्रदेश के 826 विकास खंडों में सुविधाएँ स्थापित की जाएंगी। इसके साथ ही ई-रक्षा चलाने वाली महिलाओं के लिए चार्जिंग स्टेशन और अन्य आवश्यक सुविधाएँ विकसित की जाएंगी। यह कदम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय में स्थिर वृद्धि सुनिश्चित करेगा।

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