वेस्ट-सेंट्रिक सोच से हटती दुनिया
यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका के कई देश अब पारंपरिक पश्चिम-केंद्रित आर्थिक मॉडल से बाहर निकलने लगे हैं। उनकी नजर अब एक ऐसी आर्थिक धुरी पर है, जहां पश्चिम और पूर्व के बीच संतुलन हो और इस संतुलन का सबसे मजबूत स्तंभ भारत बनता जा रहा है। मजबूत लोकतंत्र, विशाल बाजार, राजनीतिक स्थिरता और रणनीतिक स्वायत्तता भारत को स्वाभाविक विकल्प बनाते हैं।
ब्रिटेन का चीन रुख: संकेत साफ
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर का चीन दौरा इसी बदलते वैश्विक समीकरण का प्रतीक है। आठ वर्षों में किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की यह पहली चीन यात्रा होगी। इसका उद्देश्य साफ है। अमेरिका को एक अनिश्चित साझेदार मानते हुए आर्थिक जोखिम को कम करना। ब्रिटेन अब चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों को नए सिरे से मजबूत करना चाहता है। वरिष्ठ मंत्रियों और उद्योग जगत के बड़े नामों के साथ हो रही यह यात्रा बताती है कि लंदन अब वॉशिंगटन पर पूरी तरह निर्भर रहने को तैयार नहीं है।
भारत–EU FTA: गेमचेंजर समझौता
इस बदलती वैश्विक तस्वीर का सबसे बड़ा उदाहरण भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता है। इस ऐतिहासिक डील को यूरोपीय संघ ने “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा है। यह समझौता दुनिया की एक चौथाई से ज्यादा वैश्विक GDP और करीब दो अरब लोगों को जोड़ता है। इससे भारतीय टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग और आईटी सेक्टर को यूरोप में बड़ा बाजार मिलेगा
कनाडा की नई दिशा: भारत प्राथमिक
अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा कनाडा भी अब अपनी रणनीति बदल रहा है। ट्रंप द्वारा भारी टैरिफ की धमकी और कनाडा को लेकर दिए गए विवादित बयानों के बाद ओटावा ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों से समझौता नहीं करेगा। इसी क्रम में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का भारत दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। कनाडा अगले दस वर्षों में अमेरिका के बाहर अपने निर्यात को दोगुना करने की योजना पर काम कर रहा है और भारत इस रणनीति का केंद्र बन चुका है।
ग्लोबल साउथ में भारत की बढ़ती पकड़
भारत की भूमिका केवल विकसित देशों तक सीमित नहीं है। ग्लोबल साउथ के देशों में भी भारत एक भरोसेमंद नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है। ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा की भारत यात्रा इसी दिशा में बड़ा संकेत है। विकासशील अर्थव्यवस्थाएं अब भारत को केवल एक उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि तकनीक, निवेश और रणनीतिक सहयोग के साझेदार के रूप में देख रही हैं।
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