आत्मनिर्भर भारत: Tejas Mk-2 पहली उड़ान के लिए तैयार

नई दिल्ली। भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम ने एक और निर्णायक मोड़ पर कदम रख दिया है। तेजस मार्क-2, जिसे देश का सबसे महत्वपूर्ण फाइटर जेट प्रोजेक्ट माना जा रहा है, अब अपनी पहली उड़ान की तैयारी के चरण में पहुंच चुका है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, तेजस Mk-2 का रोलआउट पूरा हो चुका है और फिलहाल विमान के आंतरिक परीक्षण चल रहे हैं। DRDO के पूर्व जॉइंट डायरेक्टर और रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन वी.एन. झा ने एक बातचीत में बताया कि यह चरण बेहद अहम है, क्योंकि इसी दौरान विमान की तकनीकी विश्वसनीयता को परखा जाता है।

इंटरनल ट्रायल से आधिकारिक रोलआउट तक

तेजस Mk-2 अभी जिस चरण में है, उसे इंटरनल रोलआउट और ग्राउंड ट्रायल कहा जाता है। इस दौरान विमान के स्ट्रक्चर, सिस्टम्स और फ्लाइट कंट्रोल्स की बारीकी से जांच की जाती है। जब ये परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे हो जाएंगे, तब विमान को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, जिसे आधिकारिक रोलआउट कहा जाता है। इसके बाद ही फ्लाइट टेस्टिंग का रास्ता खुलेगा और अंततः सीरियल प्रोडक्शन की प्रक्रिया शुरू होगी।है।

Mk-1 से कहीं ज्यादा ताकतवर Mk-2

तकनीकी रूप से तेजस Mk-2, Mk-1A की तुलना में कहीं ज्यादा उन्नत और शक्तिशाली है। जहां Mk-1A को लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की श्रेणी में रखा जाता है, वहीं Mk-2 को मीडियम वेट फाइटर जेट के रूप में डिजाइन किया गया है। इसमें अधिक ताकतवर GE F414 इंजन लगाया गया है, जो लगभग 98 किलो न्यूटन का थ्रस्ट पैदा करता है। इससे विमान को बेहतर गति, रेंज और पेलोड क्षमता मिलती है।

2026 से पहले पहली उड़ान का लक्ष्य

तेजस Mk-2 की पहली उड़ान का लक्ष्य 2026 के अंत से पहले रखा गया है। भले ही इसके कई अहम पड़ाव मीडिया की सुर्खियों से दूर पूरे किए जाएं, लेकिन कार्यक्रम अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। रोलआउट और आंतरिक परीक्षणों के बाद आने वाले महीने यह तय करेंगे कि यह स्वदेशी फाइटर जेट कब रनवे पर उतरेगा।

जब तेजस Mk-2 आसमान में पहली बार उड़ान भरेगा, तो वह सिर्फ एक विमान की उड़ान नहीं होगी, बल्कि भारत के फाइटर जेट विकास में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी। आत्मनिर्भरता, तकनीकी आत्मविश्वास और स्वदेशी शक्ति का प्रतीक।

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