फैसला क्यों लिया गया?
यह आदेश नए नियमों का पालन नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 का सख्ती से क्रियान्वयन है। सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों की आय और संपत्ति के बीच पारदर्शिता बनाए रखना और भ्रष्टाचार पर रोक लगाना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह प्रक्रिया अब तेज और केंद्रीकृत तरीके से पूरी होगी। प्रदेश के लगभग 8.74 लाख सरकारी कर्मचारी इस आदेश के दायरे में आते हैं, जिसमें सचिवालय के अधिकारी, पुलिसकर्मी, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी और राजस्व विभाग के कर्मचारी शामिल हैं।
ये जानकारी देनी होगी?
कर्मचारियों को 31 दिसंबर 2025 तक उनकी संपत्तियों का पूरा विवरण पोर्टल पर दर्ज करना होगा। इसमें शामिल हैं: अचल संपत्ति: जमीन, मकान, फ्लैट, दुकान या कोई भी निर्माण। चल संपत्ति: वाहन (कार/बाइक), बैंक बैलेंस, बीमा पॉलिसियां, शेयर, सोना-चांदी और अन्य कीमती सामान।
जवाबदेही तय की गई
इस बार सरकार केवल आदेश तक सीमित नहीं रही। सभी विभागों के आहरण और वितरण अधिकारी निर्देशित हैं कि प्रॉपर्टी रिटर्न के बिना वेतन बिल पास न करें। साथ ही, विभागीय नोडल अधिकारी पोर्टल की रोजाना निगरानी करेंगे ताकि तकनीकी समस्याओं को समय पर सुलझाया जा सके। पहले कई बार डेडलाइन बढ़ाई जाती रही है, लेकिन इस बार सरकार की सख्ती और स्पष्ट निर्देशों के कारण सभी विभागों ने कर्मचारियों को चेतावनी जारी कर दी है।

0 comments:
Post a Comment