विशेष रूप से झींगा (श्रीम्प) निर्यात में अमेरिका के हिस्सेदारी करीब 90 प्रतिशत होने के बावजूद, भारत ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया। अप्रैल–अक्टूबर 2025 की अवधि में निर्यात मूल्य में 21 प्रतिशत और मात्रा में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। फ्रोज़न झींगा के निर्यात में भी मूल्य और मात्रा में क्रमशः 17 प्रतिशत और 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
मछली उत्पादन में भी भारत ने उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई है। 2013-14 में 95.79 लाख टन उत्पादन से बढ़कर 2024-25 में यह 197.75 लाख टन हो गया, यानी लगभग 106 प्रतिशत की वृद्धि। मछली पालन और संबंधित योजनाओं से 2014-15 से अब तक 74.66 लाख रोजगार (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) उत्पन्न हुए हैं।
भारत वर्तमान में 350 से अधिक समुद्री उत्पादों का निर्यात 130 देशों में करता है। इसमें मछली पालन का योगदान लगभग 62 प्रतिशत है। वहीं, मूल्य वर्धित (वैल्यू एडेड) निर्यात ने पिछले पांच वर्षों में 56 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की, जो 4,863.40 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,589.93 करोड़ रुपये हो गया।
सरकार ने फिशरी सेक्टर को मजबूत करने के लिए कई पहलें की हैं। ब्लू रिवोल्यूशन, फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और प्रधनमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PMMKSSY) जैसी योजनाओं के तहत कुल 38,572 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी दी गई या घोषणा की गई है।
मंत्रालय के अनुसार, इन उपायों और रणनीतियों ने भारत को वैश्विक स्तर पर उच्च मूल्य, प्रोसेस्ड समुद्री उत्पादों का महत्वपूर्ण हब बनने में मदद की है। यह न केवल आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देता है, बल्कि लाखों लोगों के लिए रोजगार और नई संभावनाओं के द्वार भी खोल रहा है।
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