मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस संबंध में गंभीर नाराजगी जताई गई है। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, मंडलायुक्त और जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ई-ऑफिस पर काम करने वाले कर्मचारियों को ही वेतन जारी किया जाए।
ई-ऑफिस अनिवार्य, फिर भी लापरवाही
प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों में ई-ऑफिस व्यवस्था को अनिवार्य किया जा चुका है, ताकि कार्यप्रणाली पारदर्शी और समयबद्ध हो सके। इसके बावजूद बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी फाइलों का निस्तारण ऑफलाइन तरीके से कर रहे हैं या फिर ई-ऑफिस पर लॉग-इन तक नहीं कर रहे। आंकड़ों के अनुसार, 21 नवंबर 2025 से 20 दिसंबर 2025 के बीच करीब 58 प्रतिशत अधिकारी और कर्मचारी ऐसे रहे, जिन्होंने एक बार भी ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर पर लॉग-इन नहीं किया।
जनवरी में भी नहीं किया इस्तेमाल तो रुकेगी सैलरी
सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि यदि ये अधिकारी और कर्मचारी जनवरी माह में भी ई-ऑफिस का नियमित उपयोग नहीं करते हैं, तो उनका वेतन रोक दिया जाएगा। प्रमुख सचिव ने पत्र में कहा है कि ई-ऑफिस पर कार्य करने के प्रमाण के आधार पर ही वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि ई-ऑफिस पर पूरे महीने कार्य न करने वाले किसी कर्मचारी का वेतन जारी किया जाता है, तो इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी संबंधित कार्यालयाध्यक्ष और आहरण-वितरण अधिकारी (DDO) की होगी। इस कदम से प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की कोशिश की गई है। सरकार का मानना है कि ई-ऑफिस के जरिए फाइलों के निस्तारण में तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।

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