खुशखबरी! भारत का चावल निर्यात 19.4% बढ़ा

नई दिल्ली। भारत ने एक बार फिर वैश्विक खाद्य बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। बीते वर्ष भारत से चावल के निर्यात में 19.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह लगभग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। सरकार द्वारा चावल निर्यात पर लगी सभी पाबंदियां हटाए जाने के बाद भारतीय चावल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ता और अधिक प्रतिस्पर्धी बन गया है।

एशिया में कीमतें दस साल के निचले स्तर पर

भारत से बड़े पैमाने पर चावल की सप्लाई होने के चलते एशियाई बाजारों में चावल की कीमतें लगभग दस वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा अफ्रीका और अन्य गरीब देशों के उपभोक्ताओं को मिला है, जहां चावल सस्ता होने से खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिली है।

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, मार्च में निर्यात प्रतिबंध हटाए जाने के बाद चावल की शिपमेंट में तेज़ी आई। भारत में रिकॉर्ड उत्पादन के चलते घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनी रही, जिससे सरकार ने 2022 और 2023 में लगाए गए सभी प्रतिबंध पूरी तरह समाप्त कर दिए।

किन देशों ने खरीदा ज्यादा चावल

गैर-बासमती चावल की सबसे ज्यादा मांग बांग्लादेश, बेनिन, कैमरून, आइवरी कोस्ट और जिबूती जैसे देशों से रही। वहीं, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन ने प्रीमियम बासमती चावल की खरीद बढ़ाई। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय चावल की कीमतें अन्य देशों की तुलना में कम होने से भारत ने अपना खोया हुआ बाजार हिस्सा दोबारा हासिल कर लिया है।

निर्यात के आंकड़े क्या कहते हैं

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में चावल का निर्यात बढ़कर 21.55 मिलियन मीट्रिक टन हो गया, जबकि 2023 में यह 18.05 मिलियन मीट्रिक टन था। इससे पहले 2022 में भारत ने 22.3 मिलियन मीट्रिक टन का रिकॉर्ड निर्यात किया था। वर्ष 2025 में गैर-बासमती चावल का निर्यात 25 प्रतिशत बढ़कर 15.15 मिलियन टन तक पहुंच गया। वहीं, बासमती चावल का निर्यात 8 प्रतिशत की बढ़त के साथ रिकॉर्ड 6.4 मिलियन टन रहा।

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